Edited By Jyoti,Updated: 07 Oct, 2022 03:06 PM

अकसर देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति को सफलता मिलती है तब वे बहुत ही शान व अहम से सबको उसके बारे में बताता है। तो वहीं अगर मनुष्य किसी कार्य में असफल हो जाए तो वो सारे समाज से मुंह फेरने लगता है। उसके दिल में ये डर बैठ जाता है कि समाज
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अकसर देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति को सफलता मिलती है तब वे बहुत ही शान व अहम से सबको उसके बारे में बताता है। तो वहीं अगर मनुष्य किसी कार्य में असफल हो जाए तो वो सारे समाज से मुंह फेरने लगता है। उसके दिल में ये डर बैठ जाता है कि समाज के लोग क्या सोचेंगे। ऐसे में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि किसी भी मनुष्य को मुश्किल भरे हालातों में खुद को कमजोर नहीं करना चाहिए। अपने मनोबल को इतना मजबूत बनाकर रखें कि आप किसी भी परिस्थिति का डटकर और धैर्य से सामना कर सके। चाणक्य जी के अनुसार जिस इंसान में कुछ कर दिखाने की इच्छा होती है वे कभी भी किसी भी परिस्थिति से नहीं भागता। इतना ही नहीं जिस व्यक्ति में हुनर होता है वो किसी भी काम को करने से घबराता नहीं है, बल्कि जितना संभव हो सके उतनी मेहनत करता है। तो बता दें आज हम आपको इसी से जुड़ी चाणक्य नीति के बारे में बताने जा रहे हैं कि इसके अनुसार किन लोगों को जिम्मेदारी का काम सौंपना फायदेमंद साबित होता है। तो आइए आपको बताते हैं कैसे लोगों को सौंपना चाहिए जिम्मेदारी का काम-

चाणक्य नीति श्लोक-
अतिदीर्घोऽपि कर्णिकारो न मुसली।
अर्थ : बहुत बड़ा कनेर का वृक्ष भी मूसली बनाने के काम नहीं आता।
भावार्थ : कनेर का वृक्ष भीतर से खोखला होता है। उससे ठोस मूसली नहीं बनाई जा सकती। इसी प्रकार कमजोर मन वाले को कोई ठोस कार्य नहीं सौंपा जा सकता।
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‘कमजोर’ व्यक्ति नहीं ‘काम’ का
चाणक्य नीति श्लोक-
अतिदीप्तोऽपि खद्योतो न पावक:।
अर्थ : जुगनूं कितना भी चमकीला हो, पर उससे आग का काम नहीं लिया जा सकता।
भावार्थ : जुगनूं में चमक तो होती है पर आग नहीं होती। इसी प्रकार कमजोर व्यक्ति चाहे कितनी ही उछल-कूद मचाए अपनी बहादुरी की डींगें हांके, उससे कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं लिया जा सकता।
