Edited By Sarita Thapa,Updated: 04 Nov, 2026 01:55 PM

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। हर महीने दो एकादशी आती हैं और दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित होती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है।
Ekadashi Parana Rules : सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। हर महीने दो एकादशी आती हैं और दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित होती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखते हैं। माना जाता है कि रमा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, एकादशी व्रत में जितना महत्व व्रत रखने का है, उतना ही महत्व सही समय पर पारण करने का भी है। शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी तिथि में उचित समय पर व्रत खोलना शुभ माना जाता है। तो आइए जानते हैं रमा एकादशी व्रत का पारण कब और किस विधि से करना चाहिए।
रमा एकादशी व्रत का पारण कब किया जाता है?
रमा एकादशी का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को किया जाता है। रमा एकादशी व्रत पारण के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 41 मिनट से सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय सुबह 10 बजकर 30 मिनट रहेगा। रमा एकादशी व्रत का पारण 6 नवंबर 2026 को किया जाएगा।

रमा एकादशी व्रत का पारण कैसे करें?
द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, फल, तुलसी दल और भोग अर्पित करें।
भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जाप करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्न, फल, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें। धार्मिक मान्यता है कि द्वादशी पर दान-पुण्य करने से व्रत का फल बढ़ता है।
पूजा संपन्न होने के बाद भगवान विष्णु को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें। इसके बाद हल्का और सात्विक भोजन करें।

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