पुरुषार्थ के लिए अनिवार्य हैं ये 4 चीजें

Edited By Updated: 29 Dec, 2019 01:54 PM

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एक बच्चा ध्यान से नाली के गंदे पानी में चमकीले लाल रंग के कीड़ों को देख रहा था। उसे वे कीड़े बड़े सुंदर लग रहे थे।

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एक बच्चा ध्यान से नाली के गंदे पानी में चमकीले लाल रंग के कीड़ों को देख रहा था। उसे वे कीड़े बड़े सुंदर लग रहे थे। उस बच्चे को दुख भी हो रहा था कि ये गंदे पानी में कैसे पड़े हैं। नाली के कीड़े कितने भी सुंदर क्यों न हों वे गंदे पानी में ही पैदा होते हैं और उसी से आहार ग्रहण कर जिंदा रहते हैं। वास्तव में जितने भी मनुष्येतर प्राणी हैं वे खास प्राकृतिक परिवेश में उत्पन्न होते हैं, उसी में परवरिश पाते हैं और उसी में खुश रहते हैं। कोई भी प्राणी जब तक उसका जीवन संकट में न हो, अपना परिवेश बदलने की नहीं सोचता। लेकिन मनुष्य? मनुष्य हमेशा अपने परिवेश को बेहतर बनाने के लिए तत्पर रहता है क्योंकि इसके बिना उसका विकास संभव ही नहीं। 
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कई लोग अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में पैदा होते हैं। घोर अभाव, निर्धनता व बीमारी की परिस्थितियों में आंखें खोलते हैं और उसी को स्वीकार कर निश्चित बैठे रहते हैं। कई बार उनमें और गंदी नाली के कीड़ों की जिंदगी में कोई अंतर नहीं होता। बेशक नाली के कीड़े के लिए वह स्थिति असामान्य नहीं लेकिन मनुष्य के लिए इसे किसी भी सूरत में सामान्य नहीं कहा जा सकता।
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धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों पुरुषार्थ मनुष्य के लिए अनिवार्य बताए गए हैं। संस्कृति के दायरे में रह कर वह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों पुरुषार्थ हासिल करता है। देश काल के अनुसार धर्म का पालन अनिवार्य है। धर्म जीवन को संबल प्रदान करता है। हमारी संस्कृति को बनाए रखने में सहायक होता है। वास्तव में वे सभी तत्व जो जीवन को सकारात्मकता प्रदान करते हैं, धर्म के अंतर्गत आते हैं। धर्म के साथ-साथ अर्थोपार्जन भी अनिवार्य है लेकिन वह पूर्ण रूप से धर्मसम्मत होना चाहिए। अर्थोपार्जन में चारित्रिक या नैतिक पतन नहीं होना चाहिए। काम की उपेक्षा भी संभव नहीं। काम के अभाव में धर्म, अर्थ अथवा मोक्ष ये तीनों पुरुषार्थ न तो अपेक्षित हैं और न ही संभव। 

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