Gupt Navratri: खास योग में आरंभ होंगे आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, पढ़ें पूरी जानकारी

Edited By Niyati Bhandari, Updated: 22 Jun, 2022 07:45 AM

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सत्य सनातन धर्म को मानने वालों में नवरात्रि पर्व का बहुत महत्व होता है। यह त्यौहार आदि अनादि शक्ति रूपी माता को समर्पित होता है। इन नौ दिनों में माता के उपासक माता को विभिन्न प्रकार से रिझाकर

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Ashadha gupt Navratri 2022: सत्य सनातन धर्म को मानने वालों में नवरात्रि पर्व का बहुत महत्व होता है। यह त्यौहार आदि अनादि शक्ति रूपी माता को समर्पित होता है। इन नौ दिनों में माता के उपासक माता को विभिन्न प्रकार से रिझाकर देवी मां की अपार कृपा को प्राप्त कर अपना मानव जीवन धन्य करने का भाव रखते हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार एक वर्ष में चार बार नवरात्रि का पर्व आता है, जिनमें दो बार सामान्य नवरात्रि जो कि चैत्र और अश्विन महीने में आते हैं। वर्ष में दो ही बार गुप्त नवरात्रि होती हैं जो कि माघ और आषाढ़ महीने में आते हैं। इन गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी मां के उपासक गुप्त रूप में ही माता की आराधना कर आर्शीवाद प्राप्त करते हैं।

ज्योतिष विज्ञान की रचना करने वाले महार्षि भृगु जी महाराज मार्गदर्शन करते हुए कहते हैं कि गुप्त रूप में की गयी भक्ति हमेशा बहुगुणा प्रभाव बनाती है। विशेष दिन, स्थान, समय पर किया गया दान एवं भक्ति बहुगुणा प्रभाव बनाती है और वह प्रभाव जन्म जन्मांतर तक बना रहता है इसलिए भक्तगण इस गुप्त नवरात्रि का बहुमूल्य समय का पूर्ण सदुपयोग करने का प्रयास करते हैं। माता के सिद्ध स्थानों पर भंडारे, जागरण, दान, मंत्र साधना इत्यादि धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन होते रहते हैं। हमें भी इस दिव्य समय पर माता के इन नौ दिनों के दौरान भक्तिमय होकर माता की पूर्ण कृपा को गुप्त रूप में प्राप्त करना चाहिए। 

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Ashadha gupt navratri 2022 shubh muhurat: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आरम्भ हो जाते हैं। इस वर्ष में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरम्भ 30 जून 2022 दिन गुरुवार को हो रहा है। इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 5 बजकर 26 मिन्ट से लेकर 6 बजकर 43 मिन्ट तक रहेगा। इसी दिन ग्रहों के कारण कुछ विशेष योग बन रहे हैं, जिस कारण से यह गुप्त नवरात्रि का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दिन गुरू पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, विडाल योग, अडाल योग बन रहे हैं। इसी के साथ-साथ पुष्य नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। जिससे कि इन योगों का महत्व और अधिक हो जाता है। इस शुभ समय के दौरान किया गया कोई भी शुभ कार्य बहुगुणा प्रभाव बनाता है।

इन नौ दिनों के दौरान प्रातः काल में स्नान इत्यादि के पश्चात देवी माता की विधि-विधान से पूजा अर्चणा करनी चाहिए। जीवन में सुख समृद्धि की कामना के साथ उनका उपभोग करने का आर्शीवाद प्राप्त करने की प्रार्थना करनी चाहिए। इन नौ दिनों के दौरान माता को किन किन वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए। 

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पहले दिन: मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफेद वस्तु का भोग लगाने से रोगमुक्त होने का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

दूसरे दिन: ब्रहाचारिणी माता को मिश्री, चीनी एवं पंचामृत का भोग लगाने से लंबी आयु का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

तीसरे दिन: माता चंद्रघंटा को दूध एवं दूध से बनी वस्तुओं का भोग लगाने से दुखों से मुक्ति हो जाती है।

चौथे दिन: माता कुष्मांडा को मीठी वस्तु एवं मालपुओं का भोग लगाने से बृद्धि तीव्र एवं निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।

पांचवे दिन: स्कंदमाता को केले का भोग लगाने से स्वस्थ शरीर एवं रोगों से मुक्त होने का आर्शीवाद प्राप्त होता है। 

छठें दिन: आकर्षक व्यक्तित्व, पति प्राप्ति एवं सुंदरता के लिये माता कात्यायिनी को शहद का भोग लगाना चाहिए।

सांतवें दिन: मां कालरात्रि को गुड़ एवं नैवेध का भोग लगाने से संकटों, अचानक भय, शत्रु इत्यादि से मुक्ति मिलती है एवं सुरक्षा होती रहती है। 

आंठवे दिन: माता महागौरी को नारियल का भोग लगाने से संतान के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का समाधान हो जाता है। 

नौवें दिन: मां सिद्धिदात्री को हलवा, चना एवं पूरी तथा खीर इत्यादि का भोग लगाने से सुख व समृद्धि में वृद्धि होती है।

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Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM)

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