Kartik Purnima: आज का दिन है खास, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

Edited By Updated: 08 Nov, 2022 11:16 AM

kartik purnima

भारतीय सनातन संस्कृति में कार्तिक मास की पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक, दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। पौराणिक आख्यानों में वर्णन आता है कि त्रिपुरासुर नामक दैत्य के अत्याचारों से जब सभी देवतागण आतंकित हो गए थे,

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Kartik Purnima 2022: भारतीय सनातन संस्कृति में कार्तिक मास की पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक, दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। पौराणिक आख्यानों में वर्णन आता है कि त्रिपुरासुर नामक दैत्य के अत्याचारों से जब सभी देवतागण आतंकित हो गए थे, तब भगवान शिव ने देवताओं की प्रार्थना पर कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरासुर का वध करके संपूर्ण देवताओं के देवत्व की रक्षा का मंगल कार्य किया था। इसी दिन विष्णु जी ने वेदों एवं धर्म की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार लिया था। कार्तिक पूर्णिमा भगवान विष्णु की योगनिद्रा से जागने की बेला है। 

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भगवान विष्णु को संपूर्ण सृष्टि का पालनहार माना गया है और सभी देवगणों ने हर्षित होकर कार्तिक पूर्णिमा को दीप प्रज्ज्वलित करके विष्णु जी की स्तुति की थी इसलिए विशेष रूप से कार्तिक की पूर्णिमा ‘देव दीपावली’ के नाम से प्रसिद्ध है। 

Regional Celebration And Significance of Kartik Purnima: सिख धर्म तथा जैन धर्म में भी इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का जन्म दिवस इसी पूर्णिमा को मनाया जाता है। जैन धर्म के उपासक इस अवसर पर अपने पहले तीर्थंकर भगवान आदित्यनाथ के पावन उपदेशों पर चलने का संकल्प लेते हैं।  

Kartik Purnima 2022 Upay: ऐसे पावन समय में जप, तप, धार्मिक अनुष्ठान करने का विशेष महत्व है। सायंकाल के समय खुले आकाश में पीपल के पेड़ों, तुलसी के पौधों के नीचे दीपदान का विशेष महत्व है, जिससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हमारे शास्त्रों में दीपक को आत्मज्योति का प्रतीक माना जाता है।  

दीपक जलाते समय करें इस महामंत्र का जाप- हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।

Kartik Purnima Significance: कार्तिक मास को मनुष्य के मोक्ष का द्वार भी कहा गया है। ईश्वरीय साधना के पथिक इस मास को साधना की दृष्टि से सर्वोपरि मानते हैं। वैदिक वांग्मय में पूर्णिमा के अवसर पर अग्निहोत्र का विशेष रूप से विधान किया गया है। पूर्णिमा पर किया गया यज्ञ कर्म मनुष्य को आंतरिक तथा बाहरी समृद्धि प्रदान करता है।  

हमारी चेतना में सदैव देवों जैसी दिव्यता तथा सात्विकता हो, प्रतिपल हमारे अंतर्मन में शाश्वत आध्यात्मिक ज्ञान रूपी प्रकाश जागृत रहे, यही इस ‘देव दीपावली’ कार्तिक पूर्णिमा का उद्देश्य है।

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