Edited By Prachi Sharma,Updated: 11 Jan, 2026 10:21 AM

Kashi Vishwanath Darshan : माघ मेले के चलते काशी में श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार बना हुआ है। इस बढ़ती भीड़ का असर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में भी साफ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को ही ढाई लाख से अधिक भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन और पूजन किए।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Kashi Vishwanath Darshan : माघ मेले के चलते काशी में श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार बना हुआ है। इस बढ़ती भीड़ का असर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में भी साफ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को ही ढाई लाख से अधिक भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन और पूजन किए। इसी बीच महाशिवरात्रि के अवसर पर संभावित भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने दर्शन और पूजन की ऑनलाइन बुकिंग अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है। 15 और 16 फरवरी के लिए किसी भी प्रकार की बुकिंग स्वीकार नहीं की जाएगी और इन तिथियों के लिए जारी किए गए सभी ऑनलाइन टिकट स्वतः रद्द माने जाएंगे।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन श्रद्धालुओं का भुगतान पहले ही हो चुका है, उन्हें दोबारा भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। भुगतान राशि 24 घंटे के भीतर स्वतः वापस हो जाएगी। यदि तय समय में राशि वापस नहीं आती है, तो भक्त हेल्प डेस्क नंबर 6393131608 पर संपर्क कर सकते हैं। मंगला आरती के लिए किसी प्रकार की वेटिंग लिस्ट की व्यवस्था नहीं है। यदि बुकिंग प्रक्रिया सफल नहीं होती है, तो भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा और राशि अपने आप रिफंड हो जाएगी।
काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि माघ मेले के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रतिदिन लगभग दो से ढाई लाख भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। मकर संक्रांति के आसपास भीड़ और अधिक रहने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालुओं को सावन के सोमवार की तरह पूरी तरह बैरिकेडिंग के माध्यम से नियंत्रित तरीके से दर्शन कराए जाएंगे।
नए साल की शुरुआत से अब तक करीब 20 लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं। माघ मेले और संगम स्नान के बाद लौटने वाले श्रद्धालुओं की वजह से आने वाले दिनों में यह संख्या प्रतिदिन तीन लाख से अधिक पहुंच सकती है। हालांकि 14 और 15 जनवरी के लिए सुगम दर्शन की ऑनलाइन बुकिंग अभी जारी है। सीईओ के अनुसार पिछली पूर्णिमा के स्नान पर्व पर भी श्रद्धालुओं की संख्या तीन लाख से अधिक रही थी। इसी अनुभव के आधार पर इस बार जरूरत पड़ने पर ‘डायनामिक प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था’ लागू की जा सकती है, जिसमें हर घंटे भीड़ की स्थिति के अनुसार दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। अंतिम निर्णय मौके की परिस्थितियों को देखकर लिया जाएगा।