Laxmi Chalisa : पैसों की तंगी से छुटकारा दिलाएगी ये चालीसा, मां लक्ष्मी करेंगी धनवर्षा

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 02:49 PM

laxmi chalisa

Laxmi Chalisa : हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। हर व्यक्ति की यह कामना होती है कि उसके घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास हो और कभी आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। लेकिन कई बार कड़ी मेहनत...

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Laxmi Chalisa : हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। हर व्यक्ति की यह कामना होती है कि उसके घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास हो और कभी आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। लेकिन कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी फल नहीं मिलता या पैसा घर में टिकता नहीं है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, ऐसी स्थिति में 'लक्ष्मी चालीसा' का पाठ एक रामबाण उपाय माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त नियमित रूप से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करता है, उस पर मां लक्ष्मी अपनी कृपा की वर्षा करती हैं और उसके जीवन से दरिद्रता का समूल नाश हो जाता है।

Laxmi Chalisa

॥दोहा॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।

मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

सोरठा
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

॥चौपाई॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥

श्री लक्ष्मी चालीसा
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥

॥दोहा॥
त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

Laxmi Chalisa

The importance of Lakshmi Chalisa लक्ष्मी चालीसा का महत्व

लक्ष्मी चालीसा मां लक्ष्मी की स्तुति में रचित 40 चौपाइयों का एक सिद्ध संग्रह है। इसमें मां के स्वरूप, उनकी शक्तियों और भक्तों पर उनकी दया का वर्णन है।

इसके पाठ से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

यदि आप लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबे हैं, तो इसका नियमित पाठ मार्ग प्रशस्त करता है।

चंचल स्वभाव वाली लक्ष्मी माता इस पाठ से प्रसन्न होकर साधक के घर में स्थिर रूप से निवास करने लगती हैं।

 
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