Edited By Jyoti,Updated: 14 Oct, 2022 12:43 PM

एक लड़के के अनेक मित्र थे, जिसका उसे बहुत घमंड था। उसके पिता का एक ही मित्र था लेकिन सच्चा था। एक दिन पिता ने बेटे को बोला कि तेरे बहुत सारे दोस्त हैं, उनमें से आज रात तेरे सबसे अच्छे दोस्त की परीक्षा लेते हैं।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
एक लड़के के अनेक मित्र थे, जिसका उसे बहुत घमंड था। उसके पिता का एक ही मित्र था लेकिन सच्चा था। एक दिन पिता ने बेटे को बोला कि तेरे बहुत सारे दोस्त हैं, उनमें से आज रात तेरे सबसे अच्छे दोस्त की परीक्षा लेते हैं।
बेटा तैयार हो गया। रात के 2 बजे दोनों, बेटे के सबसे घनिष्ठ मित्र के घर पहुंचे। बेटे ने दरवाजा खटखटाया, दरवाजा नहीं खुला। बार-बार दरवाजा ठोकने के बाद दोनों ने सुना कि अंदर से बेटे का दोस्त अपनी माता जी से कह रहा था कि, ‘‘मां कह दे, मैं घर पर नहीं हूं।’’
यह सुनकर बेटा उदास हो गया अत: निराश होकर दोनों घर लौट आए।
दूसरे दिन पिता ने कहा बेटा! आज मेरे दोस्त के घर चलो। दोनों रात के 2 बजे पिता के दोस्त के घर पहुंचे।पिता ने अपने मित्र को आवाज लगाई। उधर से जवाब आया कि ठहरना मित्र, दो मिनट में दरवाजा खोलता हूं।जब दरवाजा खुला, तो पिता के दोस्त के एक हाथ में रुपए की थैली और दूसरे हाथ में तलवार थी। पिता ने पूछा-यह क्या है मित्र!
1100 रुपए मूल्य की जन्म कुंडली मुफ्त में पाएं । अपनी जन्म तिथि अपने नाम , जन्म के समय और जन्म के स्थान के साथ हमें 96189-89025 पर वाट्स ऐप करें

तब मित्र बोला-अगर मेरे मित्र ने दो बजे रात्रि को मेरा दरवाजा खटखटाया है तो जरूर वह मुसीबत में होगा और अक्सर मुसीबत दो प्रकार की होती है या तो रुपए-पैसे की या किसी से विवाद हो गया हो। अगर तुम्हें रुपए की आवश्यकता हो तो, यह रुपए की थैली ले जाओ और किसी से झगड़ा हो गया हो तो तलवार लेकर मैं तुम्हारे साथ चलता हूं।
तब पिता ने अपने मित्र से कहा-मित्र मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं है। मैं तो बस बेटे को मित्रता की परिभाषा समझा रहा था। यह देखकर बेटे की आंखें खुल गईं।