Ravi Pradosh Vrat 2026 : महादेव को करना है प्रसन्न तो फाल्गुन के अंतिम प्रदोष पर अपनाएं ये सरल विधि

Edited By Updated: 28 Feb, 2026 03:04 PM

ravi pradosh vrat 2026

Ravi Pradosh Vrat 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। साल 2026 में फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत बेहद खास होने वाला है, क्योंकि यह रविवार के दिन पड़ रहा है, जिससे यह 'रवि...

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Ravi Pradosh Vrat 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। साल 2026 में फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत बेहद खास होने वाला है, क्योंकि यह रविवार के दिन पड़ रहा है, जिससे यह 'रवि प्रदोष' का अद्भुत संयोग बना रहा है। होली के हुड़दंग और रंगों के उत्सव से ठीक पहले महादेव की आराधना का यह अवसर आध्यात्मिक शुद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। आइए जानते हैं रवि प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में विस्तार से।

रवि प्रदोष व्रत 2026 
साल 2026 में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि मार्च के पहले सप्ताह में पड़ रही है। रविवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे रवि प्रदोष कहा जाता है, जो स्वास्थ्य और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है।

तिथि और समय
रवि प्रदोष व्रत तिथि: 1 मार्च 2026 (रविवार)

प्रदोष काल (पूजा का समय): शाम 06:20 PM से रात 08:45 PM तक (स्थान के अनुसार सूर्यास्त के समय में थोड़ा बदलाव संभव है)।

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में ही की जाती है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।

रवि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व
रवि प्रदोष का संयोग शिव और सूर्य की कृपा का मेल है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। रवि प्रदोष का व्रत करने से लंबी बीमारी से मुक्ति मिलती है और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।  जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है या जिन्हें नौकरी में परेशानी आ रही है, उन्हें यह व्रत जरूर करना चाहिए। होली का त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। उससे ठीक पहले पड़ने वाला यह प्रदोष व्रत मन और आत्मा को पवित्र कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम बनता है।

महादेव को प्रसन्न करने की पूजन विधि 

प्रातः काल का संकल्प
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (संभव हो तो सफेद या गुलाबी) धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें: "हे देवाधिदेव महादेव, आज मैं आपके निमित्त रवि प्रदोष व्रत रख रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें।"

 सूर्य देव को अर्घ्य
चूंकि यह रवि प्रदोष है इसलिए तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य नारायण को अर्घ्य दें। इससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

प्रदोष काल पूजन
शाम को सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले दोबारा स्नान करें। भगवान शिव का सपरिवार (माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी) पूजन करें।

अभिषेक: शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) अर्पित करें।

विशेष सामग्री: महादेव को बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, भस्म और सफेद चंदन अर्पित करें।

दीपक: गाय के घी का एक दीपक जलाएं और शिव चालीसा या 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।

रवि प्रदोष कथा
पूजा के अंत में रवि प्रदोष व्रत की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। बिना कथा के व्रत अधूरा माना जाता है।

होली से पहले के विशेष उपाय
चूंकि यह फाल्गुन का अंतिम प्रदोष है इसलिए कुछ विशेष उपाय आपकी होली को खुशियों से भर सकते हैं:

आर्थिक तंगी के लिए: शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करें।

पारिवारिक शांति के लिए: शिव-पार्वती को एक साथ लाल गुलाल अर्पित करें और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।

नकारात्मकता दूर करने के लिए: प्रदोष के दिन घर में कपूर और लौंग जलाकर धुआं करें।
 

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