Srimad Bhagavad Gita: छोड़ दो अज्ञानता में जीना

Edited By Updated: 15 Nov, 2023 10:54 AM

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जीवन एक दोतरफा प्रक्रिया है। हमें विभिन्न उत्तेजनाएं प्राप्त होती हैं और हम उनका जवाब देते रहते हैं। इस सन्दर्भ में श्री कृष्ण कहते हैं कि सत्य को जानने वाला स्वयं के साथ संयुक्त होकर सोचता है। श्री कृष्ण सत्य के ज्ञाता के चरम अनुभव का वर्णन करते...

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Srimad Bhagavad Gita: जीवन एक दोतरफा प्रक्रिया है। हमें विभिन्न उत्तेजनाएं प्राप्त होती हैं और हम उनका जवाब देते रहते हैं। इस सन्दर्भ में श्री कृष्ण कहते हैं कि सत्य को जानने वाला स्वयं के साथ संयुक्त होकर सोचता है। श्री कृष्ण सत्य के ज्ञाता के चरम अनुभव का वर्णन करते हैं। जैसा कि हम नियमित रूप से प्रशंसा और अपमान से उत्पन्न होने वाली भावनाओं का अनुभव करते हैं, हम देखते हैं कि प्रशंसा हमें खुद को भुला देती है जैसे कि कौवे और लोमड़ी की एक प्रसिद्ध कहानी में कौवा अपनी गायन क्षमता के बारे में लोमड़ी से प्रशंसा सुनकर अपने मुंह में पकड़ी रोटी गिरा देता है।

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इसी तरह, जब आलोचना की जाती है, तो आलोचना की तीव्रता और आलोचक की ताकत के आधार पर हमारी प्रतिक्रिया मौन से लेकर मौखिक या फिर शारीरिक तक भिन्न होती है। हम इन आलोचनाओं से उत्पन्न उत्तेजनाओं को सत्य मानते हैं और उनके साथ पहचान करते हैं। यह दुख की ओर ले जाता है, खास कर जब हम उन्हें व्यक्तिगत रूप से लेते हैं। हमारी इंद्रियां आधुनिक समय के इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों की तरह हैं, जो स्वचालित रूप से बाहरी उत्तेजनाओं से प्रभावित होती हैं, जैसे ध्वनि के प्रति कान और प्रकाश के प्रति आंख और यह उत्तेजना जीवित रहने के लिए आवश्यक है।

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बाहरी उत्तेजना की प्रतिक्रिया हमारे द्वारा स्वचालित या नियंत्रित हो सकती है। अज्ञानता में जीना प्रतिक्रियाशील होना है, जहां उत्तेजनाओं की प्रतिक्रिया यांत्रिक होती हैं। हालांकि, इन्द्रियां यंत्रवत रूप से इन्द्रिय वस्तुओं की ओर खींची जाने वाली प्रकृति की ओर जागृत होकर अपनी प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकती हैं।

प्रशंसा और अपमान जैसी उत्तेजनाओं के साथ हमारी पहचान ही बाधा है, जो जीवन भर चलने वाले कर्म-बंधन के निशान पैदा करती है,  इसलिए श्री कृष्ण हमें यह महसूस करने की सलाह देते हैं, कि इंद्रियां यांत्रिक रूप से इंद्रिय विषयों के साथ जुड़ जाती हैं और ‘मैं’ कुछ भी नहीं करता। यह अनुभूति कर्त्ता से साक्षी तक जाने के अलावा और कुछ नहीं।

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