ईरान-US में जंग तेज! मिडिल ईस्ट में 3500 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात, क्या और भड़केगी युद्ध की आग?

Edited By Updated: 29 Mar, 2026 03:03 AM

escalating war in the middle east deployment of 3 500 us troops

संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को काफी बढ़ा दिया है। ईरान से जुड़े बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका ने 3,500 से अधिक सैनिक तैनात किए हैं। इस तैनाती में सबसे अहम भूमिका USS Tripoli की है, जिसमें करीब 2,500 मरीन सवार हैं। यूएस...

इंटरनेशनल डेस्कः संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को काफी बढ़ा दिया है। ईरान से जुड़े बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका ने 3,500 से अधिक सैनिक तैनात किए हैं। इस तैनाती में सबसे अहम भूमिका USS Tripoli की है, जिसमें करीब 2,500 मरीन सवार हैं। यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह जहाज अपने ऑपरेशनल क्षेत्र में पहुंच चुका है।

USS Tripoli एक आधुनिक “बिग डेक” एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, जो F-35 जैसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर जेट और ओस्प्रे विमान संचालित करने में सक्षम है। इसे पहले जापान में तैनात किया गया था और करीब दो हफ्ते पहले इसे यहां भेजा गया।

इसके अलावा USS Boxer और सैन डिएगो से अन्य नौसैनिक इकाइयों को भी इस क्षेत्र में रवाना किया गया है।

 ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में 11,000 से ज्यादा हमले

यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अब तक 11,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं, जो इस सैन्य अभियान की व्यापकता को दर्शाता है।


अमेरिका का बयान: बिना जमीनी सैनिकों के लक्ष्य हासिल करने की कोशिश

मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका बिना ग्राउंड ट्रूप्स उतारे अपने लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को बदलते हालात के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।

ईरान का हमला, अमेरिकी सैनिक घायल

तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से प्रिंस सुल्तान एयर बेस (सऊदी अरब) को निशाना बनाया। इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। इसी बीच ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।

 हूती विद्रोहियों की एंट्री से बढ़ी चिंता

हूती (यमन के ईरान समर्थित विद्रोही) ने इजराइल की ओर मिसाइल दागने की जिम्मेदारी ली है। उनकी एंट्री से खासकर बाब-एल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो स्वेज नहर की ओर जाने वाला अहम व्यापारिक मार्ग है, उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

शिपिंग और उड़ानें प्रभावित

इस संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन और हवाई मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई देश वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद जैसा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हूती विद्रोही व्यापारिक जहाजों पर हमले जारी रखते हैं, तो समुद्री सुरक्षा और कमजोर हो सकती है और वैश्विक ऊर्जा कीमतें और बढ़ सकती हैं।

कूटनीति नाकाम, ईरान ने ठुकराया प्रस्ताव

अमेरिका ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ के जरिए युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और अहम समुद्री रास्तों को फिर से खोलने की बात थी। लेकिन ईरान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और बदले में मुआवजा और अपनी संप्रभुता की मान्यता जैसी मांगें रखीं।

बढ़ता खतरा: क्षेत्रीय अस्थिरता का जोखिम

जंग के कम होने के कोई संकेत नहीं हैं और नए पक्षों की एंट्री से हालात और जटिल हो गए हैं। ऐसे में पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े स्तर पर अस्थिरता का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!