Edited By Radhika,Updated: 29 Jan, 2026 11:15 AM

बजट सत्र 2026-27 के आगाज के साथ ही केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण में किए गए दावों पर सवाल उठाए हैं। चिदंबरम ने...
Budget 2026: बजट सत्र 2026-27 के आगाज के साथ ही केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण में किए गए दावों पर सवाल उठाए हैं। चिदंबरम ने 'विकसित भारत-जी राम जी' (VB-G RAM G) कानून के तहत 125 दिनों के रोजगार की गारंटी को "छलावा और भ्रम" करार दिया है।
चिदंबरम ने आंकड़ों के साथ घेरा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर राष्ट्रपति के संबोधन का जवाब देते हुए चिदंबरम ने कहा कि हकीकत कागजी दावों से कोसों दूर है। उन्होंने तर्क दिया:
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MGNREGA का हवाला: हाल के वर्षों में मनरेगा के तहत एक परिवार को औसतन केवल 50 दिन का रोजगार मिला है।
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फंड की कमी: रोजगार कम मिलने का कारण काम की कमी नहीं, बल्कि सरकार द्वारा पर्याप्त बजट आवंटित न करना था।
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बजट पर सवाल: चिदंबरम ने पूछा कि अगर सरकार औसतन 50 दिन का रोजगार भी ठीक से नहीं दे पाई, तो यह आंकड़ा अचानक 'जादुई' रूप से 125 दिन कैसे हो जाएगा? क्या सरकार इसके लिए बजट को 2.5 गुना बढ़ाएगी?
खोखला वादा है 125 दिन का दावा
कांग्रेस नेता ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "125 दिन की गारंटी एक खोखला वादा है। जब आप हकीकत से दूर वादे कर रहे हैं, तो फिर 365 दिन की ही गारंटी क्यों नहीं दे देते?"
संसद में हुआ था विरोध
उल्लेखनीय है कि जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रामीण विकास और रोजगार के लिए 'विकसित भारत-जी राम जी' कानून का जिक्र किया, तो विपक्ष के सांसदों ने सदन में खड़े होकर इसका कड़ा विरोध किया। यह बजट सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें सरकार और विपक्ष के बीच आर्थिक मुद्दों पर कड़ी बहस होने की उम्मीद है।