कैंसर मरीजों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने सस्ती ‘निवोलुमैब’ दवा की दी मंजूरी

Edited By Updated: 13 Jan, 2026 04:44 PM

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भारत में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए न्याय के गलियारे से एक राहत भरी खबर आई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारतीय दवा निर्माता कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज़ (Zydus Lifesciences) को कैंसर की बेहद...

नेशनल डेस्क: भारत में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए न्याय के गलियारे से एक राहत भरी खबर आई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भारतीय दवा निर्माता कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज़ (Zydus Lifesciences) को कैंसर की बेहद महंगी दवा 'निवोलुमैब' (Nivolumab) का सस्ता विकल्प बाजार में उतारने की अनुमति दे दी है। यह फैसला इसलिए विशेष है क्योंकि इसने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के पेटेंट अधिकारों के मुकाबले आम आदमी के जीने के अधिकार को प्राथमिकता दी है।

क्या है पूरा विवाद?

अमेरिकी दिग्गज कंपनी ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब अपनी दवा 'ओपडिवो' (Opdiva) को पेटेंट सुरक्षा के तहत बेचती है, जिसकी कीमत आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर है। जाइडस ने इसी का एक किफायती बायोसिमिलर (समान असर वाली दवा) ZRC 3276 तैयार किया था। शुरुआत में एक एकल पीठ ने इस पर रोक लगा दी थी क्योंकि मूल दवा का पेटेंट मई 2026 तक सुरक्षित है। लेकिन अब कोर्ट की खंडपीठ ने इस रोक को हटाकर रास्ता साफ कर दिया है।

अदालत की मानवीय टिप्पणी: "कानून जनहित की ओर झुके"

जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने इस मामले में जो कहा, वह भविष्य के लिए एक मिसाल बन गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • जब मुकाबला 'जीवन रक्षक दवाओं' का हो, तो कानून को बौद्धिक संपदा अधिकारों के बजाय लोक कल्याण की तरफ झुकना चाहिए।

  • सिर्फ पेटेंट के नाम पर देश की एक बड़ी आबादी को सस्ती और आधुनिक चिकित्सा से वंचित रखना संवैधानिक रूप से गलत है।

  • कोर्ट ने जाइडस को अपनी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया है ताकि भविष्य में पेटेंट धारक के अधिकारों का भी हिसाब रखा जा सके।

मरीजों की जेब पर पड़ेगा भारी असर (70% की बचत)

कैंसर का इलाज अक्सर मध्यमवर्गीय परिवारों को दिवालियापन की कगार पर खड़ा कर देता है। निवोलुमैब एक ऐसी 'इम्यूनोथेरेपी' है जो शरीर को कैंसर से लड़ने के लिए खुद तैयार करती है, लेकिन इसकी भारी कीमत एक बड़ी बाधा थी।

  • सस्ता इलाज: जाइडस का दावा है कि उनकी दवा मूल दवा के मुकाबले 70% तक सस्ती होगी।

  • पहुंच: जो दवा अब तक केवल बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों तक सीमित थी, वह अब छोटे शहरों और सरकारी केंद्रों में भी सुलभ हो सकेगी।

  • उपयोग: यह दवा फेफड़ों, किडनी और त्वचा (मेलानोमा) के कैंसर में रामबाण मानी जाती है।

 

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