भारत में कोरोना के दो नए वेरिएंट्स की एंट्री, जानें एक्सपर्ट की सलाह

Edited By Updated: 26 May, 2025 08:40 PM

entry of two new variants of corona in india

भारत में कोविड-19 के दो नए सब-वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 की पहचान होने के बाद एक बार फिर लोगों में चिंता देखी जा रही है। हालांकि डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।

नेशनल डेस्क: भारत में कोविड-19 के दो नए सब-वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 की पहचान होने के बाद एक बार फिर लोगों में चिंता देखी जा रही है। हालांकि डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। ये दोनों वेरिएंट ओमिक्रॉन के ही उप-प्रकार हैं और इनमें कुछ ऐसे म्यूटेशन हुए हैं जो इन्हें तेजी से फैलने में मदद करते हैं। इंडियन SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में तमिलनाडु में NB.1.8.1 का एक केस मिला था, जबकि मई में गुजरात में LF.7 के चार मरीज सामने आए। इसके अलावा केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली जैसे राज्यों में भी कोविड के मामलों में हल्का इजाफा देखा गया है।

कितना खतरनाक है नया वेरिएंट?

एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये दोनों वेरिएंट, ओमिक्रॉन के JN.1 वेरिएंट के सब-वेरिएंट्स हैं। JN.1 भारत के लिए नया नहीं है, यह अगस्त 2023 में ही सामने आ चुका था और बाद में दुनिया भर में डोमिनेंट वेरिएंट बन गया। इन वेरिएंट्स की खासियत यह है कि इनमें स्पाइक प्रोटीन पर म्यूटेशन हुआ है, जिससे यह वायरस शरीर की इम्यूनिटी को चकमा देकर आसानी से संक्रमण फैला सकता है। हालांकि अच्छी खबर यह है कि ये वेरिएंट गंभीर बीमारी नहीं पैदा कर रहे हैं। सामान्य तौर पर इसके लक्षण हल्के होते हैं जैसे –

किन्हें है ज्यादा सावधानी की जरूरत?

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य स्वस्थ लोगों के लिए इन वेरिएंट्स से फिलहाल बड़ा खतरा नहीं है। लेकिन जिन्हें पहले से कोई बीमारी है, जैसे:

  • डायबिटीज

  • दिल की बीमारी

  • किडनी या फेफड़ों की बीमारी

  • कमजोर इम्यून सिस्टम
    उन्हें अधिक सतर्क रहना चाहिए।

डॉ गुलेरिया कहते हैं कि ऐसे लोगों को भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचना चाहिए और कोविड प्रोटोकॉल अपनाना चाहिए।

भारत में मौजूदा स्थिति

 डॉक्टरों का मानना है कि मौजूदा वैक्सीन अब भी इन वेरिएंट्स से सुरक्षा प्रदान कर रही है। खासकर गंभीर लक्षणों से बचाव में वैक्सीन मददगार है। इसके अलावा ओमिक्रॉन और उसके वेरिएंट्स से संक्रमित होने के बाद जो नेचुरल इम्यूनिटी विकसित हुई है, वो भी रक्षा कवच का काम कर रही है।

WHO की क्या है राय?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने NB.1.8.1 और LF.7 को Variants Under Monitoring (VUM) की श्रेणी में रखा है, यानी ये वेरिएंट्स अभी जांच और निगरानी के दौर में हैं, लेकिन इन्हें खतरनाक नहीं माना गया है। सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों में ये वेरिएंट सामने जरूर आए हैं, लेकिन वहां के मरीजों की हालत सामान्य रही और ज्यादातर लोग बिना हॉस्पिटल गए ही ठीक हो गए।

क्या फिर से लॉकडाउन की जरूरत पड़ेगी?

नहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय और ICMR की निगरानी टीमों के मुताबिक देश में मजबूत निगरानी तंत्र काम कर रहा है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। लॉकडाउन जैसी कोई संभावना नहीं है। जरूरी है तो बस सावधानी और नियमित निगरानी।

जरूरी एहतियात क्या हैं?

विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार हर नागरिक को कुछ आसान लेकिन कारगर सावधानियां जरूर अपनानी चाहिए:

  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें

  • साबुन या सैनिटाइज़र से हाथ साफ करें

  • बुखार, खांसी, गले में खराश जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करें

  • बुजुर्ग और बीमार लोग बूस्टर डोज लेने पर विचार करें

  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और पर्याप्त नींद व पोषण लें

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