चीन के पास 2,290 टन सोना, भारत के पास 879.58 टन, RBI का खुलासा: दुनिया के बड़े देश क्यों खरीद रहे हैं इतना सोना?

Edited By Updated: 31 May, 2025 12:05 PM

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जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता हो, युद्धों की आशंका बनी रहे और करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव सामान्य हो जाए, तो एक ही संपत्ति होती है जिस पर सरकारें और निवेशक भरोसा करते हैं—सोना। यही वजह है कि आज के दौर में सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि देश...

नई दिल्ली: जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता हो, युद्धों की आशंका बनी रहे और करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव सामान्य हो जाए, तो एक ही संपत्ति होती है जिस पर सरकारें और निवेशक भरोसा करते हैं—सोना। यही वजह है कि आज के दौर में सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि देश की सरकारें भी अपने गोल्ड रिजर्व को लगातार बढ़ा रही हैं। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत के गोल्ड होल्डिंग्स को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है।

भारत का गोल्ड रिजर्व: अब 879.58 टन!

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक भारत का कुल स्वर्ण भंडार 879.58 टन हो गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले 57.58 टन अधिक है। इतना ही नहीं, इस सोने की वित्तीय वैल्यू में 57% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस बात का संकेत है कि सोने को लेकर भारत का भरोसा और निवेश दोनों बढ़े हैं।

  चीन और अमेरिका की गोल्ड होल्डिंग

  • चीन भी इसी राह पर है। फरवरी 2025 में चीन की सेंट्रल बैंक PBoC ने 5 टन सोना खरीदा। यह लगातार चौथा महीना रहा जब चीन ने सोने का भंडार बढ़ाया। फिलहाल चीन के पास 2,290 टन से ज्यादा सोना है, जो उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 6% है।

  • अमेरिका, गोल्ड रिजर्व की रेस में सबसे आगे है। उसके पास कुल 8,133.5 टन सोना है, जिससे वह इस सूची में अव्वल बना हुआ है।

  • जर्मनी भी पीछे नहीं है। वहां का कुल गोल्ड होल्डिंग लगभग 3,500 टन है।

सोना खरीदने की वजह: आखिर क्यों हो रहा है गोल्ड में निवेश?

  • स्थिर और सुरक्षित एसेट: सोना आमतौर पर स्थिर रिटर्न देने वाला एसेट माना जाता है। इसमें अत्यधिक वोलैटिलिटी नहीं होती और जब होती है, तो भी रिकवरी जल्दी हो जाती है।

  • ग्लोबल टेंशन का असर: रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडल ईस्ट संघर्ष जैसे कई घटनाक्रमों ने दुनिया को यह एहसास कराया है कि एक सुरक्षित फाइनेंशियल बैकअप जरूरी है।

  • करेंसी पर निर्भरता कम करना: डॉलर जैसी मुद्राओं की गिरती विश्वसनीयता के बीच देश गोल्ड को एक भरोसेमंद गारंटी के रूप में देख रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

अगर देश की सरकारें और केंद्रीय बैंक गोल्ड जैसे एसेट में भरोसा दिखा रही हैं, तो आम निवेशक के लिए भी यह एक स्पष्ट संकेत है कि पोर्टफोलियो में सोना शामिल करना एक विवेकपूर्ण निर्णय हो सकता है। आज गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड, और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्प इस दिशा में नए रास्ते खोल रहे हैं।

 

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