Edited By Mehak,Updated: 04 Jan, 2026 11:28 AM

चांदी की कीमतों में हाल ही में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली है, जो $82.67 प्रति औंस तक पहुंची। इसके पीछे बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड, बैटरी और सोलर पैनल इंडस्ट्री में बदलाव और चीन-अमेरिका के बीच आर्थिक टकराव प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि...
नेशनल डेस्क : साल की शुरुआत में ही चांदी की कीमतों ने तेजी पकड़ी है और 2 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार कर लिया है। इस रफ्तार को देखकर विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में चांदी 3 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। लेकिन पिछले हफ्ते में आए उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव
सोमवार को COMEX चांदी $82.670 प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई तक पहुंची, लेकिन दिन के अंत तक $71.300 प्रति औंस पर बंद हुई। इसका मतलब है कि सिर्फ एक दिन में 13.75% की गिरावट आई। 2025 में बढ़ती डिमांड और सप्लाई की कमी के कारण चांदी के दाम लगभग 180% बढ़ चुके हैं।
इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने से तेज रफ्तार
सैमसंग जैसी कंपनियों द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा के बाद इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ी। इसके कारण चांदी की कीमतों में भारी उछाल देखा गया।
चीन और अमेरिका के बीच अंदरूनी टकराव
चांदी की कीमतों को लेकर अमेरिका और चीन के बीच भी टकराव चल रहा है। अमेरिका मेटल की कीमतों को नियंत्रित रखना चाहता है, जबकि चीन इसे बढ़ाना चाहता है ताकि डॉलर की वैल्यू पर असर पड़े और मेटल बेस्ड इकोनॉमी को बढ़ावा मिले।
सप्लाई में बाधा और प्रॉफिट-बुकिंग
अमेरिका-वेनेजुएला तनाव के कारण पेरू और चाड से चांदी की सप्लाई में रुकावट आई। इसके अलावा, 1 जनवरी 2026 से चीन ने चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन लगाया। इन कारणों से प्रॉफिट-बुकिंग के बाद चांदी ने निचले स्तर पर समर्थन पाया।
एक्सपर्ट्स की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चांदी का दाम खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इंडस्ट्रियल डिमांड के बढ़ते खर्च के कारण कंपनियां अब अन्य विकल्पों की ओर देख रही हैं। Photovoltaic सेल और सोलर पैनल में पहले ही तांबे की तरफ रुख हो चुका है। अनुज गुप्ता, डायरेक्टर, या वेल्थ ने निवेशकों को सलाह दी है कि चांदी में भारी बढ़त के बाद गिरावट की संभावना हमेशा रहती है। FY27 में चांदी की कीमतों में 60% तक गिरावट आ सकती है। उन्होंने 1980 और 2011 के इतिहास का उदाहरण दिया, जब चांदी की कीमतों में तेजी के बाद भारी गिरावट आई थी।
निवेशकों के लिए सुझाव
विशेषज्ञों का कहना है कि सिल्वर इन्वेस्टर्स को सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आपने लॉन्ग पोजीशन रखी है, तो प्रॉफिट-बुकिंग पर विचार करना सुरक्षित रहेगा। साथ ही मार्केट के उतार-चढ़ाव पर नजर रखना जरूरी है।