Edited By Radhika,Updated: 28 Mar, 2026 04:30 PM

मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते युद्ध के संकट ने सात समंदर पार भारत की राजधानी दिल्ली के रसोई घर और स्ट्रीट फूड के जायके को बिगाड़ दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का सीधा असर अब दिल्ली-NCR के आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए...
नेशनल डेस्क: मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते युद्ध के संकट ने सात समंदर पार भारत की राजधानी दिल्ली के रसोई घर और स्ट्रीट फूड के जायके को बिगाड़ दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का सीधा असर अब दिल्ली-NCR के आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि जो गैस सिलेंडर कभी ₹1050 में मिलता था, वह अब कालाबाजारी के चलते ₹3000 तक पहुँच गया है।
गैस की किल्लत और ब्लैक मार्केटिंग का खेल
दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 की बात करें तो यहां के कुछ लोकल वेंडर्स का आरोप है कि कुछ दुकानदार 'आपदा को अवसर' में बदलते हुए ₹100 प्रति किलो मिलने वाली गैस को ₹300 से ₹500 प्रति किलो के भाव पर बेच रहे हैं। इसके चलते छोटे दुकानदारों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है।
कितना बढ़ा आपकी पसंदीदा डिश का दाम?
ईंधन की कीमतों में लगी इस आग ने दिल्ली के मशहूर स्ट्रीट फूड को 10 से 25 रुपये तक महंगा कर दिया है:
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डिश (Street Food)
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पहले की कीमत
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अब की कीमत (युद्ध के बाद)
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छोले भटूरे
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₹40
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₹50
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सब्जी पूरी
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₹40
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₹50
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आलू कुलचा
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₹40
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₹50
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प्याज पराठा
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₹50
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₹60
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लिट्टी चोखा
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₹40
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₹50
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चाय (एक कप)
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₹10
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₹20
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रोज़ी-रोटी पर संकट: वेंडर्स और नौकरीपेशा बेहाल
इस युद्ध का असर वेंडर्स पर पड़ता हुआ दिख रहा है। छोले कुलचे और पराठे बेचने वाली एक वेंडर के अनुसार कच्चा माल और गैस महंगी होने के कारण दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गई है। दूसरी ओर ऑफिस जाने वाले मिडिल क्लास लोगों का कहना है कि सैलरी स्थिर है, जबकि बाकी चीज़ें महंगी हो गई हैं। दिल्ली की सड़कों पर सजे ये ठेले जो लाखों की आजीविका का सहारा हैं, आज ईंधन की कमी और महंगाई के कारण झकझोर दिए गए हैं।