Strait of Hormuz के बीच जयराम रमेश ने याद दिलाया 1956 का 'स्वेज संकट'; वी.के. कृष्ण मेनन की कूटनीति का किया जिक्र

Edited By Updated: 17 Mar, 2026 05:28 PM

jairam ramesh reminds us of the 1956 suez crisis in the strait of hormuz

मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर मंडराते खतरे के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति का जिक्र किया है। उन्होंने 1956 के प्रसिद्ध Suez Crisis की याद दिलाते हुए बताया कि कैसे...

नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर मंडराते खतरे के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति का जिक्र किया है। उन्होंने 1956 के प्रसिद्ध Suez Crisis की याद दिलाते हुए बताया कि कैसे भारत ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में कभी पहल नहीं की है। इस मामले में जयराम रमेश ने पोस्ट करते हुए लिखा कि दुनिया इस समय होरमुज स्ट्रेट संकट से जूझ रही है, ठीक 70 साल पहले दुनिया ने स्वेज संकट देखा था।

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दुनिया इस समय होरमुज स्ट्रेट संकट से जूझ रही है, ठीक 70 साल पहले दुनिया ने स्वेज संकट देखा था।

26 जुलाई 1956 को मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इससे पश्चिमी देशों में भारी हंगामा मच गया और युद्ध के बादल मंडराने लगे। इस संकट के समाधान के लिए… pic.twitter.com/TpyWllf3Ng

— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) March 17, 2026

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26 जुलाई 1956 को मिस्र के राष्ट्रपति नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इससे पश्चिमी देशों में भारी हंगामा मच गया और युद्ध के बादल मंडराने लगे। इस संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों के केंद्र में कोई और नहीं, बल्कि वी.के. कृष्ण मेनन थे। उन्होंने शानदार सफलता हासिल की, लेकिन केवल कुछ समय के लिए।

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नवंबर 1956 की शुरुआत में मिस्र पर हमला रुकने के बाद, संयुक्त राष्ट्र की एक आपातकालीन सेना को सिनाई और गाज़ा में मिस्र-इजरायल सीमा पर तैनात किया गया। यह सेना दस देशों (जिसमें भारत भी शामिल था) से मिलकर बनी थी और जून 1967 की शुरुआत तक सक्रिय रही। दिसंबर 1959 से जनवरी 1964 तक इसके कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. ज्ञानि थे, और जनवरी 1966 से जून 1967 तक मेजर जनरल इंदर जीत रिक्ये ने इसका नेतृत्व किया। 20 मई 1960 को पंडित नेहरू ने स्वयं गाज़ा पट्टी में तैनात भारतीय टुकड़ी को संबोधित किया था। संयुक्त राष्ट्र की इस आपातकालीन सेना के हटते ही छह-दिवसीय युद्ध शुरू हो गया। यहां कृष्ण मेनन को नासिर, एंटनी ईडन और सेल्विन लॉयड के साथ उनकी व्यस्त कूटनीतिक कोशिशों के दौरान देखा जा सकता है।

 

 

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