'नैनो यूरिया भारत का भविष्य', जानें बातचीत में किसानों से क्या बोले केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया

Edited By Updated: 29 Dec, 2022 06:45 PM

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रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने पारंपरिक दानेदार यूरिया के स्थान पर नैनो तरल यूरिया को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह बेहतर, सस्ता और सुविधाजनक है

नई दिल्लीः रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने पारंपरिक दानेदार यूरिया के स्थान पर नैनो तरल यूरिया को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह बेहतर, सस्ता और सुविधाजनक है और इससे सरकार को भारी मात्रा में सब्सिडी बचाने में मदद मिलेगी। जून, 2021 में सहकारी संस्था इफको ने पारंपरिक यूरिया के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया पेश किया था। इसने नैनो यूरिया का उत्पादन करने के लिए विनिर्माण संयंत्र भी स्थापित किए हैं।

इफको नैनो यूरिया 500 मिलीलीटर, 240 रुपये प्रति बोतल की कीमत पर बेच रही है, जो 45 किलोग्राम के पारंपरिक यूरिया के एक बैग की जगह ले सकता है। इस बैग वाले यूरिया की कीमत लगभग 265 रुपये है। नैनो यूरिया पर कोई सरकारी सब्सिडी नहीं है। विभिन्न राज्यों के चार किसानों और प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) के दो मालिकों के साथ वर्चुअल बातचीत में मांडाविया ने नैनो यूरिया सहित विभिन्न उर्वरकों की उपलब्धता के बारे में पूछताछ की और यह भी पूछा कि क्या इन केंद्रों पर किसानों को अन्य सलाहकार सेवाएं मिल रही हैं।

एक योजना के तहत देश में लगभग तीन लाख खुदरा उर्वरक दुकानों को चरणबद्ध तरीके से पीएमकेएसके में बदला जा रहा है। ये पीएमकेएसके किसानों की विभिन्न प्रकार की जरूरतों को पूरा करेगा और कृषि-लागतों (उर्वरक, बीज, उपकरण), मिट्टी, बीज और उर्वरक के लिए परीक्षण सुविधाएं प्रदान करेगा, किसानों में जागरूकता पैदा करेगा, विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देगा और ब्लॉक/जिला स्तर की दुकानों पर खुदरा विक्रेताओं की नियमित क्षमता निर्माण सुनिश्चित करेगा। अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 600 पीएमकेएसके का उद्घाटन किया था। अब, 9,000 से अधिक पीएमकेएसके चालू हो गए हैं।

मांडाविया को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में एक लाख से अधिक पीएमकेएसके स्थापित किए जाएंगे। बातचीत के दौरान मंडाविया ने कहा कि सरकार ने पिछले आठ वर्षों में उर्वरक क्षेत्र में कई सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया सहित विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व अब बाजार में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार किया जा सकता है। नैनो यूरिया के उपयोग के लाभों के बारे में बताते हुए मांडाविया ने कहा कि यह नया उत्पाद बिना किसी सरकारी सब्सिडी के भी पारंपरिक यूरिया से सस्ता है।

मांडविया ने कहा कि नैनो यूरिया पर कोई सरकारी सब्सिडी नहीं है और इसलिए भारी बचत होगी। चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी खर्च पिछले साल के लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 2.25-2.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यूरिया के 45 किलोग्राम के बैग की तुलना में नैनो यूरिया की एक बोतल ले जाना आसान है। उन्होंने कहा कि तरल यूरिया भी मिट्टी की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना फसल की उपज को बढ़ा सकता है। मंडाविया ने कहा कि सरकार किसानों के बीच जागरूकता पैदा करके नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा देगी।

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