वोडाफोन-आइडिया को लेकर बोले सिंधिया, कहा- Vi को सरकारी कंपनी बनाने का कोई उद्देश्य नहीं

Edited By Updated: 02 Jul, 2025 08:21 PM

scindia said about vi there is no intention make vi government company

दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2 जुलाई को स्पष्ट कर दिया कि सरकार की Vodafone Idea (Vi) को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी (PSU) में बदलने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि सरकार की हिस्सेदारी 49% से ज्यादा नहीं हो सकती...

National Desk : दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2 जुलाई को स्पष्ट कर दिया कि सरकार की Vodafone Idea (Vi) को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में बदलने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि सरकार की हिस्सेदारी 49% से ज्यादा नहीं हो सकती और Vi को सरकारी कंपनी बनाने का कोई उद्देश्य नहीं है।

शेयर कन्वर्जन पर क्या कहा मंत्री ने?
सिंधिया ने बताया कि टेलीकॉम कंपनियों को बकाया राशि के बदले शेयर में तब्दील करने की मांग करने का अधिकार है, लेकिन हर मामले में दूरसंचार विभाग और वित्त मंत्रालय द्वारा उचित स्तर पर जांच की जाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारती एयरटेल ने भी इसी तरह की मांग की थी, और उसकी जांच प्रक्रिया के बाद ही कोई निर्णय लिया गया।

टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा जरूरी
मंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में सिर्फ दो कंपनियों का वर्चस्व स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए सही नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के बहुत कम देशों में मोबाइल टेलीकॉम सेक्टर में चार प्रमुख ऑपरेटर होते हैं, और भारत को एक संतुलित प्रतिस्पर्धा बनाए रखनी चाहिए।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की टेलीकॉम कंपनियां पूंजी निवेश के मामले में वैश्विक स्तर पर उदाहरण बन चुकी हैं और अब यह कंपनियों के प्रबंधन पर निर्भर करता है कि वे बेहतर कमाई के लिए किस रास्ते को अपनाते हैं।

सैटेलाइट कम्युनिकेशन और TRAI की भूमिका
सैटेलाइट संचार के लिए स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण पर बात करते हुए सिंधिया ने बताया कि TRAI ने सभी संबंधित पक्षों से विमर्श करने के बाद अपनी सिफारिशें दी हैं। उन्होंने कहा कि सैटकॉम स्पेक्ट्रम साझा संसाधन है और इसकी कीमत निजी स्पेक्ट्रम जैसी नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि TRAI की सिफारिशों को अंतिम मंजूरी मिलने में कुछ महीने का समय लग सकता है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि ये सिफारिशें सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।

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