Edited By Radhika,Updated: 25 Mar, 2026 04:53 PM

सरकारी कर्मचारियों के लिए किसी भी वेतन आयोग में 'फिटमेंट फैक्टर' काफी महत्वपूर्ण होता है। फिटमेंट फैक्टर वह जादुई संख्या होती है, जो उनकी Basic Pay और कुल भत्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है। जैसे-जैसे 8वें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट बढ़ रही है,...
8th pay Commission: सरकारी कर्मचारियों के लिए किसी भी वेतन आयोग में 'फिटमेंट फैक्टर' काफी महत्वपूर्ण होता है। फिटमेंट फैक्टर वह जादुई संख्या होती है, जो उनकी Basic Pay और कुल भत्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाती है। जैसे-जैसे 8वें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट बढ़ रही है, कर्मचारी संगठनों की नजर इसी फैक्टर पर टिकी है।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
आसान शब्दों में कहें तो, फिटमेंट फैक्टर एक 'मल्टीप्लायर' है जिसका उपयोग कर्मचारी की वर्तमान बेसिक सैलरी को संशोधित कर नई बेसिक सैलरी तय करने के लिए किया जाता है। यदि फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो आपकी बेसिक पे बढ़ती है, जिससे आपका महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य भत्ते भी स्वतः बढ़ जाते हैं।

उदाहरण से समझें फिटमेंट फैक्टर
वेतन आयोग के इतिहास में फिटमेंट फैक्टर ने हमेशा बड़ा अंतर पैदा किया है। इसे एक उदाहरण से समझें- 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये तय हुई थी। अब कर्मचारी संघ मांग कर रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 3.00 या उससे अधिक किया जाए। यदि यह 3.68 होता है, तो न्यूनतम वेतन सीधे 26,000 रुपये के पार पहुँच सकता है।
एरियर (Arrear) पर सीधा प्रभाव
फिटमेंट फैक्टर का असर केवल भविष्य की सैलरी पर ही नहीं, बल्कि पिछले बकाया यानी एरियर पर भी पड़ता है। फिटमेंट फैक्टर का आंकड़ा जितना ऊंचा होगा, एरियर के रूप में मिलने वाली एकमुश्त राशि उतनी ही बड़ी होगी। यह कर्मचारियों की Total Earnings को तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है।

क्यों है यह 8वें वेतन आयोग की 'चाबी'?
8वें वेतन आयोग के लागू होने पर फिटमेंट फैक्टर ही वह आधार बनेगा जिससे देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की वित्तीय स्थिति तय होगी। यह न केवल महंगाई के प्रभाव को कम करने में मदद करता है, बल्कि कर्मचारियों के जीवन स्तर में भी सुधार लाता है।