Edited By jyoti choudhary,Updated: 26 Mar, 2026 02:01 PM

भारत में घरों और मंदिरों में जमा सोने के भंडार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का सोना मौजूद है, जो भारत की जीडीपी का लगभग 125% है।
बिजनेस डेस्कः भारत में घरों और मंदिरों में जमा सोने के भंडार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का सोना मौजूद है, जो भारत की जीडीपी का लगभग 125% है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मंदिरों में जमा सोने को भी जोड़ दिया जाए, तो कुल भंडार लगभग 50,000 टन तक पहुंचता है, जिसकी अनुमानित कीमत 10,000 अरब डॉलर है।
अर्थव्यवस्था में लाने की जरूरत क्यों?
पूर्व केंद्रीय मंत्री P. P. Chaudhary और उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि इस सोने को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना जरूरी है। उनका कहना है कि घरों में रखा सोना आर्थिक गतिविधियों में योगदान नहीं देता। सोने के वित्तीयकरण से आयात पर निर्भरता घटेगी। चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव कम होगा।
EGR क्या है और कैसे करेगा मदद?
National Stock Exchange (NSE) के अधिकारी Sriram Krishnan के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।
EGR एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें-...
- लोग अपना भौतिक सोना जमा कर सकते हैं
- इसके बदले डिजिटल रिसीट मिलती है
- इस रिसीट का ट्रेड शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर किया जा सकता है
हालांकि, इस पर लगने वाला 3% GST इसके विस्तार में बड़ी बाधा बना हुआ है।
सोने की कीमत और मांग में तेजी
रेटिंग एजेंसी ICRA Limited के अनुसार, पिछले दो वित्त वर्षों में सोने की कीमतों में करीब 30-30% की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, आभूषणों की मांग मजबूत बनी हुई है। प्रमुख रिटेलर्स ने डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की है। 2024-25 और 2025-26 में स्टोर्स का विस्तार करीब 20% तक हुआ है।