एथेनॉल बनाने में चीनी के इस्तेमाल पर बैन, सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला?

Edited By Updated: 17 Oct, 2026 06:20 AM

ban on use of sugar in making ethanol why did the govt take this big decision

त्यौहारों के मौसम में चीनी के आसमान छूते दामों और बाजार में इसकी किल्लत की बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने एथेनॉल के उत्पादन में...

नई दिल्ली: त्यौहारों के मौसम में चीनी के आसमान छूते दामों और बाजार में इसकी किल्लत की बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने एथेनॉल के उत्पादन में चीनी और गन्ने के रस के इस्तेमाल पर पूरी तरह से मनाही कर दी है।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी हुए नए नियम 
सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी किए गए नए टेंडर में चीनी के इस्तेमाल से एथेनॉल बनाने की अनुमति को शून्य (ज़ीरो) कर दिया गया है। इस फैसले के तहत अब एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का रस, चीनी की चाशनी और B-हैवी शीरे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

क्यों लेना पड़ा सरकार को यह सख्त फैसला? 
दरअसल, देश में चीनी उत्पादन को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही थीं। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश और खराब मौसम के कारण इस साल गन्ने का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है, जबकि पिछले सीजन में भी शुरुआत में उत्पादन काफी कम रहा था।

सरकार का मुख्य उद्देश्य उपलब्ध गन्ने का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा चीनी तैयार करने में इस्तेमाल करना है, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे। जब गन्ने के रस या चीनी से पूरा शीरा निकालकर एथेनॉल बनाया जाता है, तो उससे बनने वाली चीनी की मात्रा कम हो जाती है। इसी किल्लत से बचने के लिए यह रोक लगाई गई है।

अब इन वैकल्पिक स्रोतों से तैयार होगा एथेनॉल 
चीनी से एथेनॉल बनाने पर रोक के बाद सरकार ने अनाज आधारित वैकल्पिक स्रोतों पर जोर देना शुरू कर दिया है। अब एथेनॉल बनाने के लिए मक्का, टूटे हुए चावल (चावल की टुकड़ी) और अतिरिक्त चावल जैसे अनाज का उपयोग किया जाएगा।

तेल विपणन कंपनियों ने नए टेंडर में इन वैकल्पिक स्रोतों से लगभग 1100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां मांगी हैं। हालांकि, मक्के से बनने वाले एथेनॉल के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में कुछ कटौती की गई है।

कीमतों पर दिखेगा असर 
इस नीतिगत बदलाव को लेकर सरकार पिछले कई दिनों से गहन चर्चा कर रही थी, जिसके बाद यह अंतिम निर्णय लिया गया है। आने वाले समय में बाजार में सप्लाई सुधरने से इस फैसले का सकारात्मक असर चीनी की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

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