Edited By Harman,Updated: 04 Mar, 2026 12:56 PM

Business : देशभर में होली का उत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन शेयर बाजार में पेंट सेक्टर के लिए माहौल उत्साहजनक नहीं है। त्योहार के दिन बाजार खुला जरूर है, मगर निवेशकों ने पेंट कंपनियों से दूरी बना रखी है। पिछले कारोबारी सत्र में आई तेज गिरावट के बाद 4...
Business : देशभर में होली का उत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन शेयर बाजार में पेंट सेक्टर के लिए माहौल उत्साहजनक नहीं है। त्योहार के दिन बाजार खुला जरूर है, मगर निवेशकों ने पेंट कंपनियों से दूरी बना रखी है। पिछले कारोबारी सत्र में आई तेज गिरावट के बाद 4 मार्च को भी इस सेक्टर में दबाव बना हुआ है।
दिग्गज कंपनियों के शेयर लाल निशान में
बाजार खुलने के साथ ही पेंट कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। एशियन पेंट का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 2.5% टूटकर 2,250 रुपये के आसपास पहुंच गया,जबकि बर्गर पेंट के शेयरों में भी लगभग ढाई प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और भाव 430 रुपये के करीब रहे। वहीं इंडिगो पेंट में करीब 1.5% की कमजोरी देखी गई और शेयर 900 रुपये के आसपास कारोबार करते नजर आए। इससे पहले 2 मार्च के कारोबारी दिन भी इन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद से निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
पेंट उद्योग काफी हद तक पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भर करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियों की लागत पर सीधा असर पड़ता है। हालिया घटनाक्रम में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है और यह 77 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अहम समुद्री मार्गों पर खतरे की आशंका से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो पेंट कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। इसी आशंका के चलते निवेशक फिलहाल इन शेयरों में मुनाफावसूली कर रहे हैं। हाल के सत्रों में कुछ कंपनियों के शेयर कई महीनों के निचले स्तर तक पहुंच चुके हैं, जो बाजार में बनी अनिश्चितता को दर्शाता है।
जानें आने वाले दिनों में क्या रहेगा हाल?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पेंट सेक्टर की दिशा आने वाले दिनों में कच्चे तेल की चाल और वैश्विक हालात पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो शेयरों में सुधार की संभावना बन सकती है, अन्यथा दबाव जारी रह सकता है।