Unclaimed Amount in Bank: बैंकों में जमा हजारों करोड़ रुपए लौटाने की तैयारी, सरकार चलाएगी अभियान

Edited By Updated: 11 Jun, 2025 11:43 AM

preparations to return thousands of crores of rupees deposited in banks

देश के बैंकों में हजारों करोड़ रुपए वर्षों से लावारिस पड़े हैं, जिन पर किसी ने अब तक दावा नहीं किया है। अब केंद्र सरकार इस दिशा में गंभीर होती दिख रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सभी वित्तीय नियामकों और संबंधित विभागों को इन जमाओं के असली...

बिजनेस डेस्कः देश के बैंकों में हजारों करोड़ रुपए वर्षों से लावारिस पड़े हैं, जिन पर किसी ने अब तक दावा नहीं किया है। अब केंद्र सरकार इस दिशा में गंभीर होती दिख रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सभी वित्तीय नियामकों और संबंधित विभागों को इन जमाओं के असली मालिकों की पहचान कर राशि लौटाने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि 'सही दावेदारों तक इन जमाओं को पहुंचाने और केवाईसी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने की जरूरत है।' इसके लिए सभी नियामकों को जिला स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने को कहा गया है।

हर जिले में लगाए जाएंगे स्पेशल कैंप

सीतारमण ने कहा कि जिला स्तर पर विशेष शिविरों के जरिए इस राशि को सही मालिकों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। यह अभियान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सेबी (SEBI), बीमा नियामक IRDAI, पेंशन नियामक PFRDA, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और बैंकिंग संस्थाओं के सहयोग से चलाया जाएगा।

दावा न किए गए फंड्स में सिर्फ बैंकों की जमा राशि ही नहीं, बल्कि शेयर, लाभांश, बीमा और पेंशन कोष की भी बड़ी हिस्सेदारी है।

कितनी है दावा न की गई राशि?

आरबीआई की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 के अंत तक बैंकों में दावा न की गई जमा राशि 26 फीसदी बढ़कर 78,213 करोड़ रुपए हो गई थी। यह रकम वर्षों से निष्क्रिय खातों, मृतक खाताधारकों की राशि या अधूरी केवाईसी प्रक्रियाओं के कारण अटकी हुई है।

NRI और PIO के लिए भी केवाईसी प्रक्रिया को डिजिटलीकरण की दिशा में बढ़ाया जाएगा कदम

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, अनिवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के लोगों (PIO) के लिए भी डिजिटल केवाईसी सुविधा को आसान बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में केवाईसी को लेकर एक समान मानदंड और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

एफएसडीसी की बैठक में लिए गए अहम निर्णय

यह चर्चा वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) की बैठक में हुई, जिसकी अध्यक्षता खुद वित्त मंत्री सीतारमण ने की। बैठक में RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास, सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे, वित्त सचिव अजय सेठ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
  

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