Edited By Sarita Thapa,Updated: 31 Oct, 2026 01:42 PM

कार्तिक मास के कृष्ण की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाले अहोई अष्टमी का व्रत सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं।
Ahoi Ashtami 2026 Star Ritual : कार्तिक मास के कृष्ण की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाले अहोई अष्टमी का व्रत सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। करवा चौथ की तरह यह व्रत भी दिन भर निर्जला रखा जाता है, लेकिन अहोई अष्टमी के व्रत के नियम करवा चौथ से थोड़े अलग हैं। करवा चौथ पर जहां महिलाएं रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं, वहीं अहोई अष्टमी पर ज्यादातर महिलाएं चंद्रमा के निकलने का इंतजार नहीं करती हैं, बल्कि शाम को आकाश में तारे देखकर उन्हें अर्घ्य देती हैं और फिर अपने व्रत का पारण करती हैं। तो आइए जानते हैं कि अहोई अष्टमी के दिन तारों को देखकर व्रत खोलने के पीछे की धार्मिक मान्यताएं और परंपरा के बारे में-
अहोई अष्टमी पर तारों के दर्शन की सदियों पुरानी परंपरा
हिंदू पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद आता है। करवा चौथ के बाद से ही चंद्रमा के निकलने का समय हर दिन देर से होने लगता है। अष्टमी तिथि तक आते-आते चंद्रमा बहुत देर रात उदित होता है। शास्त्रों में माताओं के लिए अत्यधिक कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संध्या काल के बाद तारों के उदित होते ही पूजा और अर्घ्य देने का विधान बनाया गया, ताकि पूरे दिन निर्जल रहीं माताएं समय पर व्रत पूर्ण कर सकें।
अहोई माता और तारा मंडल का धार्मिक संबंध
अहोई माता का स्वरूप
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता को 'अहोई अष्टमी देवी' और बच्चों की रक्षिका माना जाता है। अहोई माता का संबंध प्रकृति और नक्षत्र मंडल से है। शाम के समय जब आकाश में तारे दिखाई देते हैं, तो उन्हें अहोई माता के स्वरूप या उनके दूतों का प्रतीक माना जाता है।
संतान के रूप में तारों का प्रतीक
सनातन संस्कृति में तारों को अनगिनत और अमर माना गया है। माताएं आकाश के जगमगाते तारों को देखकर यह प्रार्थना करती हैं कि जैसे यह तारा मंडल ब्रह्मांड में स्थिर और उज्ज्वल है, वैसे ही उनकी संतान का जीवन भी चमकता रहे और उसकी आयु तारों की तरह लंबी व अटूट हो।
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