मैसूर की चामुंडी पहाड़ी पर विराजती हैं मां चामुंडेश्वरी, जानें 7 मंजिला गोपुरम और विशाल नंदी का रहस्य

Edited By Updated: 30 Oct, 2026 04:29 PM

chamundeshwari temple mysuru

कर्नाटक में मैसूर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल चामुंडेश्वरी मंदिर देवी चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है। चामुंडेश्वरी देवी को शक्ति का स्वरूप और महिषासुर का वध करने वाली देवी माना जाता है।

Chamundeshwari Temple Mysuru : कर्नाटक में मैसूर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल चामुंडेश्वरी मंदिर देवी चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है। चामुंडेश्वरी देवी को शक्ति का स्वरूप और महिषासुर का वध करने वाली देवी माना जाता है। मंदिर परिसर और इसके आसपास का प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। द्रविड़ स्थापत्य शैली में निर्मित इस मंदिर का सात मंजिला भव्य गोपुरम इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है। मंदिर परिसर में नंदी की विशाल प्रतिमा सहित कई अन्य धार्मिक प्रतिमाएं और स्थापत्य अवशेष भी देखने को मिलते हैं।

Chamundeshwari Temple Mysuru

इतिहास और वास्तुकला
चामुंडेश्वरी नाम का अर्थ है ‘सबकी माता’ और यह देवी के अपने भक्तों के प्रति समर्पण और प्रेम को दर्शाता है। इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी ईस्वी में राजा कृष्णदेवराय ने अपनी माता रानी जगनमोहनदेवी को श्रद्धांजलि के रूप में करवाया था। यह मंदिर मूल रूप से कावेरी नदी के पास स्थित था, लेकिन बाढ़ के कारण बाद में इसे वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधरसिम्हा नायक ने करवाया था, जिन्होंने ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर और चूने के गारे जैसी स्थानीय सामग्रियों का उपयोग किया था। मंदिर का 7 मंजिला गोपुरम पत्थर से बना है और इसकी दीवारों पर जटिल नक्काशी की गई है।

Chamundeshwari Temple Mysuru

इस गोपुरम की छत शंकु के आकार की है जो कमल के फूल जैसी दिखती है। यह गोपुरम 42 मीटर ऊंचा है जो दूर से ही दिखाई देता है। मंदिर के चांदी के प्रवेश द्वार आज भी मौजूद हैं और द्रविड़ वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरणों में से एक माने जाते हैं। ये द्वार चांदी की प्लेटों से बने हैं, जिनमें से प्रत्येक का वजन 1.5 टन है और इन पर पुष्प आकृतियां उकेरी गई हैं। प्रवेश द्वार चांदी की चादरों से बना है, जिनमें से प्रत्येक 2 मीटर चौड़ी और कमल के फूलों से सुशोभित है।

इस मंदिर में शक्ति पीठ, नंदी प्रतिमा, शिवलिंग और हिंदू धर्म के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने वाली अन्य कई मूर्तियां भी हैं। शक्ति पीठ उन 51 स्थानों में से एक है जहां देवी सती के शरीर के अंग बिखेरे गए थे। नंदी प्रतिमा एक विशाल पत्थर की बैल की मूर्ति है जो 9 मीटर ऊंची और 40 टन वजनी है। मान्यता है कि नंदी कभी हाथी थे जिन्हें भगवान शिव ने बैल में रूपांतरित कर दिया था। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं से धार्मिक मर्यादा और अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है इसलिए शालीन एवं उपयुक्त वस्त्र पहनना उचित है। पूजा के दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए।

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