पंजाब के हिन्दू मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति के लिए अदालत जाएगा हिन्दू तख्त

Edited By Updated: 10 Aug, 2023 07:35 AM

hindu temples of punjab

जालंधर (नरेन्द्र मोहन): पंजाब के 30 हिन्दू मंदिर और छोटे-बड़े 3,000 हिन्दू डेरे पंजाब सरकार के नियंत्रण में हैं। इन स्थानों की करोड़ों रुपयों की वार्षिक आय भी सरकार के पास

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जालंधर (नरेन्द्र मोहन): पंजाब के 30 हिन्दू मंदिर और छोटे-बड़े 3,000 हिन्दू डेरे पंजाब सरकार के नियंत्रण में हैं। इन स्थानों की करोड़ों रुपयों की वार्षिक आय भी सरकार के पास जा रही है। जिसे मंदिर के विकास अथवा अन्य हिन्दू धर्मार्थ कार्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा जबकि राज्य की 15,000 एकड़ से भी अधिक गौचर भूमि पर राजनीतिक लोगों का कब्जा है।
श्री हिन्दू तख्त ने फैसला किया है कि अगर सरकार ने उपरोक्त मामलों में कोई प्रयास न किया तो अगले महीने से संभवत: जन्माष्टमी से पंजाब सरकार के विरुद्ध पैदल यात्रा अभियान शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही तख्त इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करके मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की अपील करेगा।

पंजाब में जिन हिन्दू धार्मिक स्थलों पर सरकार का नियंत्रण है उनमें पटियाला का माता काली मंदिर, जिला पटियाला में ही बहादुरगढ़ का बद्रीनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर, अमृतसर का राम तीर्थ मंदिर, संगरूर में काली माता मंदिर और माता राजेश्वरी मंदिर समेत 4 मंदिर, कपूरथला के 3 मंदिर मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही राज्य में करीब 3,000 छोटे-बड़े हिन्दू डेरों पर भी सरकार का नियंत्रण है जिनकी भूमि 60,000 एकड़ है। 

श्री हिन्दू तख्त के पंजाब अध्यक्ष हितेश भारद्वाज ने बताया कि कुछ समय पूर्व मालेरकोटला में एक हिन्दू डेरे की 100 एकड़ भूमि को प्रशासन ने लीज पर देने का प्रयास किया था जिसे हिन्दू तख्त ने विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब में सिर्फ हिन्दू मंदिर ही सरकारी नियंत्रण में है जबकि शेष धर्मों के धार्मिक स्थानों पर उसी धर्म के लोगों, प्रबंधक कमेटियों का प्रबंध है। 

इसी प्रकार श्री हिन्दू तख्त गायों के लिए भी अपना आंदोलन करने की तैयारी में है। पंजाब के राजस्व विभाग के रिकार्ड में हजारों एकड़ भूमि ऐसी है जिनका इंतकाल गौशालाओं, गौ-चरांद और गौचर भूमि के नाम पर पंजीकृत है। अतीत में आजादी से पूर्व महाराजा पटियाला, नाभा, फरीदकोट और कपूरथला ने गांवों में बेसहारा, किसानों द्वारा बेघर किए पशुधन को रखने, मवेशी चराने इत्यादि के लिए भूमि का आबंटन किया था। 

इस आबंटन में स्पष्ट लिखा गया था कि यह भूमि किसी अन्य कार्य के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकेगी। अलॉट की गई इस भूमि का अधिकतर हिस्सा गांवों में है और पंचायतों के पास है। पंचायतें अब इस भूमि को अन्य शामलात, पंचायती और सरप्लस जमीन के साथ ही अपनी आय बढ़ाने के लिए ठेके पर देती है जबकि राज्य में अधिकतर स्थानों पर प्रभावशाली लोगों ने मवेशियों के लिए आबंटित करीब 15,000 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। 

श्री हिंदू तख्त इस भूमि की मुक्ति के लिए और यहां बेसहारा गायों, नंदी इत्यादि को रखने के लिए आंदोलन करेगा जबकि श्री हिन्दू तख्त खुद 10 गौशालाओं का निर्माण करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालांकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिलने का समय नहीं मिल रहा लेकिन तख्त ने उन्हें इस बारे में ज्ञापन भेज दिया है। उन्होंने दोहराया कि मंदिरों से सरकारी नियंत्रण समाप्त होना चाहिए।

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