Edited By Prachi Sharma,Updated: 27 Jan, 2026 01:56 PM

Inspirational Context : एक महिला को बात-बात पर गुस्सा आता था। गुस्से में वह हर किसी को उल्टा सीधा बोल देती थी। उसकी इस आदत की वजह से पड़ोसी, नाते-रिश्तेदार और यहां तक कि घर के लोग भी उससे दूर हो गए। हालांकि, गुस्सा शांत होने के बाद उसे अपनी गलती का...
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Inspirational Context : एक महिला को बात-बात पर गुस्सा आता था। गुस्से में वह हर किसी को उल्टा सीधा बोल देती थी। उसकी इस आदत की वजह से पड़ोसी, नाते-रिश्तेदार और यहां तक कि घर के लोग भी उससे दूर हो गए। हालांकि, गुस्सा शांत होने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास होता था, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती थी। एक दिन महिला को पता चला कि शहर में एक नामी संत आए हैं। वह महिला उनसे मिलने गई।
महिला ने कहा, ‘‘राज मेरे क्रोध करने की आदत की वजह से सभी मुझसे दूर हो गए हैं। मुझे अपनी गलती का एहसास भी होता है, लेकिन जिस वक्त यह होता है परिस्थितियां मेरे नियंत्रण में नहीं होती हैं, मैं क्या करूं।’’
महिला की बात सुनकर संत ने महिला को एक शीशी में दवा भरकर देते हुए कहा कि जब भी तुम्हें गुस्सा आए, तो इसे पी लेना। महिला ने संत की बात मानते हुए, जब भी गुस्सा आए, उस दवा को पीना शुरू कर दिया। एक हफ्ते में ही महिला को इसका नतीजा दिखने लगा और उसका गुस्सा कम हो गया।
महिला वापस संत के पास गई और बोली- आपने जो दवा दी उससे मेरा क्रोध बहुत कम हो गया है। आप मुझे बताते जाएं कि यह कौन सी दवा है, ताकि आपके जाने के बाद मैं इस दवा को ले सकूं और गुस्से को शांत कर सकूं।
महिला की बात सुनकर संत बोले- जिसे तुम दवा समझ रही थी, वह पानी था। तुम्हें क्रोध आने पर अपनी वाणी को शांत रखना था, इसलिए क्रोध आने पर इसे पीने के लिए कहा था। इस दौरान कुछ समय निकल जाने पर तुम्हारा गुस्सा शांत हो जाता था।
यह सुनकर महिला ने भविष्य में फिर कभी क्रोध न करने का प्रण लिया।