पोलैंड के उपप्रधानमंत्री ने कहा- जंग में मजबूती से डटे रहें यूक्रेन के लोग, रूस-चीन नज़दीकी पर दी चेतावनी

Edited By Updated: 18 Jan, 2026 05:25 PM

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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने यूक्रेन के लोगों से मजबूती बनाए रखने की अपील की। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध, यूरोपीय सुरक्षा, NATO की भूमिका और रूस-चीन संबंधों पर तीखी बातें रखीं।

International Desk: पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने यूक्रेन के लोगों से अपील की है कि वे कठिन हालात के बावजूद मजबूती बनाए रखें और अपनी संस्कृति व स्वतंत्रता की रक्षा करते रहें। वह रविवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में “A Continent in Crisis: Russia, Ukraine and Europe” सत्र को संबोधित कर रहे थे। लेखिका ऐन एप्पलबाम और पूर्व राजनयिक नवतेज सरना के साथ बातचीत में सिकोरस्की ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरे यूरोपीय महाद्वीप की स्थिरता को झकझोर दिया है। उन्होंने बताया कि हजारों लोगों की मौत, शहरों का विनाश और भीषण सर्दी में बिजली-पानी के बिना जीवन जीने को मजबूर नागरिक इस युद्ध की भयावह सच्चाई हैं।

 

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति पर सवाल उठाते हुए सिकोरस्की ने कहा कि जिसे रूस ने तीन दिन का “विशेष सैन्य अभियान” समझा था, वह वर्षों लंबी जंग में बदल गया है। इस संघर्ष में रूस को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है और अरबों डॉलर युद्ध पर खर्च हो रहे हैं।रूस-चीन संबंधों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि चीन पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता रूस के दीर्घकालिक हित में नहीं है और यह भविष्य में उसे कमजोर कर सकती है। यूरोपीय सुरक्षा और NATO पर बोलते हुए सिकोरस्की ने कहा कि अब यूरोप को अपनी रक्षा क्षमताएं स्वयं मजबूत करनी होंगी।

 

पोलैंड सहित कई देशों ने रक्षा बजट बढ़ाया है और यूक्रेन को सैन्य सहायता दी है। उन्होंने बताया कि पोलैंड यूक्रेन को लड़ाकू विमान देने वाले शुरुआती देशों में शामिल रहा है। यूक्रेनी शरणार्थियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि लाखों लोग पोलैंड आए हैं, जिससे आर्थिक और सामाजिक दबाव बढ़ा है, फिर भी मानवीय आधार पर हर संभव सहायता दी जा रही है।उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यूक्रेन ने कभी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु शस्त्रागार सुरक्षा गारंटी के बदले छोड़ा था, लेकिन आज उसकी क्षेत्रीय अखंडता पर हमला हो रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
 

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