Edited By Tanuja,Updated: 07 Apr, 2026 01:04 PM

संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव पद की दौड़ में चार उम्मीदवार हैं, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार महिला महासचिव बनाने की मांग तेज हो गई है, जबकि एंतोनियो गुतारेस का कार्यकाल 2026 में समाप्त होगा।
International Desk: संयुक्त राष्ट्र (UN) के अगले महासचिव पद की दौड़ में इस बार दो महिला नेताओं सहित कुल चार उम्मीदवार मैदान में हैं। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब 80 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी महिला को इस वैश्विक संगठन का प्रमुख बनाए जाने की मांग तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया इसी महीने शुरू हो रही है। चारों उम्मीदवार 21 और 22 अप्रैल को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होने वाले संवाद सत्रों में भाग लेंगे। संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान महासचिव एंतोनियो गुतारेस, पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त रह चुके हैं।
वह दिसंबर 2026 में अपना दूसरा पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने 2017 में पद संभाला था और संगठन के 80 साल के इतिहास में अब तक इस पद पर कोई महिला नहीं रही है। इस पद के लिए प्रमुख दावेदारों में चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकारों के लिए उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट, कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति और व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की महासचिव रेबेका ग्रिन्स्पैन, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी और सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सॉल शामिल हैं। इनमें बैचेलेट को ब्राजील और मैक्सिको, ग्रिन्स्पैन को कोस्टा रिका, ग्रोसी को अर्जेंटीना और सॉल को बुरुंडी ने नामित किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बियरबॉक ने बताया कि प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 21 और 22 अप्रैल को तीन-तीन घंटे के संवाद सत्र आयोजित होंगे।
महासचिव की नियुक्ति 193 सदस्यीय महासभा द्वारा सुरक्षा परिषद की सिफारिश पर की जाती है, जहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका वीटो शक्ति रखते हैं। पिछले वर्ष सितंबर में पारित एक प्रस्ताव में इस बात पर ''खेद'' जताया गया कि अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी और सदस्य देशों से महिलाओं को नामित करने का आग्रह किया गया। कई अधिकार संगठनों और अभियानों, जैसे ''वुमेन एसजी'' और ''1 फॉर 8 बिलियन'' ने महिला उम्मीदवार के चयन की मांग करते हुए कहा है कि यह केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता, प्रभावशीलता और भविष्य के लिए आवश्यक है।