'हे ईश्वर, राष्ट्रपति को दें ज्ञान...' जब पादरियों ने ट्रंप के कंधे पर हाथ रखकर मांगा दिव्य आशीर्वाद, देखें वायरल तस्वीर

Edited By Updated: 06 Mar, 2026 05:39 PM

white house prayer session goes viral as trump calls god his lord and savior

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में आयोजित प्रार्थना सभा में अपनी आस्था व्यक्त की। पादरियों ने उनके कंधों पर हाथ रखकर देश और राष्ट्रपति के लिए प्रार्थना की। इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर...

इंटरनेशनल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस से सामने आई एक तस्वीर दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आयोजित एक प्रार्थना सभा के दौरान सार्वजनिक रूप से अपनी आस्था का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ईश्वर उनके “प्रभु और उद्धारकर्ता” हैं। कार्यक्रम में कई ईसाई पादरी भी मौजूद थे, जिन्होंने अमेरिका और राष्ट्रपति के लिए प्रार्थना की। इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर बहस शुरू हो गई।

ओवल ऑफिस में हुई विशेष प्रार्थना सभा

यह प्रार्थना सभा व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आयोजित की गई थी। वहां मौजूद लोगों के अनुसार जैसे ही प्रार्थना शुरू हुई, राष्ट्रपति ट्रंप ने सिर झुका लिया और आंखें बंद कर लीं। इस दौरान कई पादरी उनके आसपास खड़े हो गए और उनके कंधों पर हाथ रखकर देश की सुरक्षा, नेतृत्व और भविष्य के लिए प्रार्थना की। पादरियों ने ईश्वर से अमेरिका को सही दिशा देने और कठिन समय में नेतृत्व को मजबूती देने की प्रार्थना की।

पादरियों ने क्या कहा?

प्रार्थना के दौरान पादरियों ने कहा कि अमेरिका इस समय एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा कि ईश्वर राष्ट्रपति को सही फैसले लेने की बुद्धि दें और देश को आने वाली चुनौतियों से सुरक्षित रखें। उनका कहना था कि जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तब आध्यात्मिक मार्गदर्शन और विश्वास लोगों को मानसिक शक्ति देता है।

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प्रार्थना के बाद ट्रंप का बयान

प्रार्थना खत्म होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने संक्षेप में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कठिन समय में देश को विश्वास और एकता की जरूरत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने आध्यात्मिक मूल्यों को याद रखना चाहिए। ट्रंप के समर्थकों का मानना है कि यह संदेश देश को नैतिक और आध्यात्मिक आधार पर मजबूत बनाने की कोशिश है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हुई यह घटना

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान मध्य-पूर्व क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। दूसरी तरफ ईरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों में राजनीतिक नेताओं के बयान और प्रतीकात्मक घटनाएं अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा महत्व रखती हैं।

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संघर्ष में धार्मिक भाषा का बढ़ता इस्तेमाल

कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे संघर्ष में धार्मिक विचारधारा और भाषा का इस्तेमाल भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान की राजनीति में धार्मिक नेतृत्व का प्रभाव पहले से ही महत्वपूर्ण माना जाता है। अब अमेरिका में भी कुछ राजनीतिक बयान धार्मिक संदर्भों के साथ सामने आ रहे हैं, जिससे इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

प्रार्थना सभा का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। ट्रंप के समर्थकों ने इसे उनकी आस्था और आध्यात्मिकता का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि कठिन समय में ईश्वर में विश्वास लोगों को मानसिक ताकत देता है। वहीं कुछ आलोचकों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि सरकार और धर्म को एक साथ जोड़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही नहीं माना जाता।

राजनीतिक नजरिए से भी अहम संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना का एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। अमेरिका में ईवेंजेलिकल ईसाई समुदाय लंबे समय से ट्रंप का समर्थक रहा है।
ऐसे में सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था व्यक्त करना इस समुदाय के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

अमेरिकी सेना से जुड़ा एक और विवाद

एक और विवाद ने अमेरिका की सेना में हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सैन्य अधिकारियों ने अपने जवानों से कहा कि ईरान के साथ संभावित युद्ध “ईश्वर की योजना” का हिस्सा है। धार्मिक स्वतंत्रता पर नजर रखने वाले संगठन मिलिट्री रिलीजियस फाउंडेशन ने इस मामले में सैकड़ों शिकायतें दर्ज होने की पुष्टि की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतों में यह भी कहा गया कि एक कमांडर ने सैनिकों से कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यीशु ने चुना है।” MRFF के अध्यक्ष और पूर्व एयर फोर्स सैनिक माइकी वेनस्टीन ने टिप्पणी की कि जब भी अमेरिका या इजरायल मिडिल ईस्ट में सक्रिय होते हैं, ईसाई राष्ट्रवादियों से जुड़े इस तरह के बयान अक्सर सामने आते हैं।

 

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