अब जाम छलकाना होगा महंगा! मिडिल-ईस्ट युद्ध के कारण भारत में महंगी हो सकती है शराब-बीयर

Edited By Updated: 25 Mar, 2026 11:18 PM

alcohol beer in india could become more expensive due to middle east conflict

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के शराब बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। देश में काम कर रही ग्लोबल शराब कंपनियों ने सप्लाई में रुकावट के चलते कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है।

नेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब भारत के शराब बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। देश में काम कर रही ग्लोबल शराब कंपनियों ने सप्लाई में रुकावट के चलते कीमतों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी है। इसकी सबसे बड़ी वजह गैस की कमी और आयात में आ रही बाधाएं बताई जा रही हैं।

कतर की गैस सप्लाई प्रभावित… भारत पर सीधा असर

Iran के हमलों के चलते कतर की गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेचुरल गैस आयातक है और अपनी करीब 40 फीसदी जरूरतें कतर से पूरी करता है। गैस की कमी का सबसे बड़ा असर कांच की बोतल बनाने वाली इंडस्ट्री पर पड़ा है।

बोतलों के दाम 20% तक बढ़े… उत्पादन भी हुआ प्रभावित

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांच बनाने वाली कंपनियों को अपना उत्पादन आंशिक या पूरी तरह से रोकना पड़ा है। इसके चलते बोतलों की कीमतों में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है। सिर्फ बोतलें ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग से जुड़ी दूसरी लागत भी बढ़ गई है। कागज के कार्टन की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं, जबकि लेबल और टेप जैसी सामग्री भी महंगी हो गई है।

एल्युमीनियम और शिपिंग संकट… कैन सप्लाई पर भी असर

शिपिंग में देरी के कारण एल्युमीनियम के आयात पर भी असर पड़ा है, जिससे कैन बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई में कटौती की चेतावनी देनी पड़ी है। यह संकट ऐसे समय पर आया है, जब भारत भीषण गर्मी की ओर बढ़ रहा है, एक ऐसा समय जब बीयर की मांग आमतौर पर तेजी से बढ़ती है।

कंपनियों की मांग… 12-15% तक कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव

ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, जो Heineken, Anheuser-Busch InBev और Carlsberg जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने कीमतों में 12 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की मांग की है। एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी के अनुसार, बढ़ती लागत के कारण कुछ ऑपरेशंस को चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

तेजी से बढ़ रहा बाजार… लेकिन संकट के बादल मंडराए

भारत का शराब बाजार तेजी से बढ़ रहा है। साल 2024 में इसका आकार करीब 7.8 अरब डॉलर आंका गया था और 2030 तक इसके दोगुना होने की उम्मीद है। बाजार में Heineken की हिस्सेदारी करीब आधी बताई जाती है, जबकि Anheuser-Busch InBev और Carlsberg की हिस्सेदारी लगभग 19-19 फीसदी है। इसके अलावा बिरा और सिंबा जैसी कंपनियां भी तेजी से बाजार में सक्रिय हो रही हैं, लेकिन मौजूदा संकट ने इस बढ़ते बाजार पर अनिश्चितता के बादल ला दिए हैं।

राज्यों की मंजूरी जरूरी… कीमत बढ़ाना इतना आसान नहीं

Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies ने भी राज्यों को पत्र लिखकर बढ़ती लागत के मद्देनजर कीमतों में बदलाव की मांग की है। भारत में शराब की कीमतें सख्ती से नियंत्रित होती हैं और इसके लिए राज्यों की मंजूरी जरूरी होती है। करीब दो-तिहाई राज्यों की मंजूरी के बिना कीमतें बढ़ाना संभव नहीं है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!