10 minute delivery: 10 मिनट डिलीवरी पर लगा ब्रेक, सरकार की सख्ती के बाद Blinkit ने किया बड़ा ऐलान

Edited By Updated: 13 Jan, 2026 03:37 PM

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भारत में क्विक कॉमर्स के 'सुपरफास्ट' दौर पर अब ब्रेक लगने वाला है। अक्सर सड़कों पर अपनी जान की बाजी लगाकर 10 मिनट के भीतर ऑर्डर पहुंचाने वाले डिलीवरी पार्टनर्स के लिए केंद्र सरकार मसीहा बनकर सामने आई है। सरकार के कड़े रुख के बाद अब डिलीवरी की यह...

नेशनल डेस्क: भारत में क्विक कॉमर्स के 'सुपरफास्ट' दौर पर अब ब्रेक लगने वाला है। अक्सर सड़कों पर अपनी जान की बाजी लगाकर 10 मिनट के भीतर ऑर्डर पहुंचाने वाले डिलीवरी पार्टनर्स के लिए केंद्र सरकार मसीहा बनकर सामने आई है। सरकार के कड़े रुख के बाद अब डिलीवरी की यह जानलेवा समय सीमा इतिहास का हिस्सा बनने जा रही है।

 उन्होंने क्विक कॉमर्स सेक्टर में सक्रिय प्रमुख कंपनियों- Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato-के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत की थी। बैठक में डिलीवरी कर्मियों पर पड़ने वाले दबाव, सड़क सुरक्षा और समय-सीमा के कारण होने वाले जोखिमों पर गंभीर चर्चा हुई। मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी तरह का विज्ञापन या प्रमोशन ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे डिलीवरी बॉय की जान खतरे में पड़े।

सरकारी हस्तक्षेप के बाद कंपनियों ने आश्वासन दिया कि वे अपने विज्ञापनों, सोशल मीडिया पोस्ट्स और ब्रांड कम्युनिकेशन से तय समय सीमा यानी “10 मिनट” जैसे शब्दों को हटाएंगी। Blinkit ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए आधिकारिक रूप से यह फीचर हटाने का ऐलान कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में अन्य क्विक कॉमर्स कंपनियां भी इसी तरह के फैसले ले सकती हैं।

दरअसल, पिछले कुछ समय से 10 मिनट डिलीवरी मॉडल के खिलाफ माहौल बनता जा रहा था। संसद में यह मुद्दा उठ चुका है और डिलीवरी कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा चुकी है। सोशल मीडिया पर भी लगातार इस मॉडल के विरोध में आवाज़ बुलंद हो रही थी। कई लोगों का मानना था कि इतनी कम समय-सीमा डिलीवरी बॉय को तेज़ रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और जोखिम भरे हालात में काम करने के लिए मजबूर करती है।

आक्रोश सिर्फ ऑनलाइन तक सीमित नहीं रहा। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशभर में लाखों डिलीवरी पार्टनर्स ने हड़ताल की। उनकी मांगें साफ थीं—बेहतर वेतन, सुरक्षित कामकाजी हालात और डिलीवरी की तय समय-सीमा को हटाया जाए। इसके अलावा, डिलीवरी कर्मियों पर होने वाली हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं ने भी इस बहस को और गंभीर बना दिया।

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कंपनियों से यह भी स्पष्ट किया कि क्विक कॉमर्स का विकास जरूरी है, लेकिन यह विकास इंसानी जान की कीमत पर नहीं होना चाहिए। कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि वे डिलीवरी सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, यथार्थवादी और मानवीय बनाएंगी।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्विक कॉमर्स कंपनियां तेज़ डिलीवरी के बिना अपने बिज़नेस मॉडल को कैसे नए सिरे से गढ़ती हैं। लेकिन इतना तय है कि 10 मिनट की दौड़ में जो जोखिम छुपे थे, उन पर अब सरकार और समाज-दोनों की नज़र है।
 

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