चीन का भूटान पर कब्जे का प्लान ! जाकरलुंग घाटी में बना रहा 2 बड़े गांव, सैटेलाइट तस्वीरों ने खोली पोल

Edited By Updated: 11 Dec, 2023 01:14 PM

china continues construction in bhutan s jakarlung valley

यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर रॉबर्ट बार्नेट ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में भूटान को लेकर चीन के घटिया इरादों की पोल खोली है। सैटेलाइट तस्वीरों के....

बीजिंगः यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर रॉबर्ट बार्नेट ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में भूटान को लेकर चीन के घटिया इरादों की पोल खोली है। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए चीन के भूटान पर कब्जे के इस प्लान का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार  चीन तेजी से भूटान के उत्तरी इलाकों के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवैलप कर रहा है। चीन के प्लान की  ये सैटेलाइट तस्वीरें ऐसे समय सामने आई हैं जब चीन और भूटान सीमा विवाद सुलझाने के प्रयास कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर रॉबर्ट बार्नेट का कहना है कि चीन नॉर्थ भूटान पर कब्जा करना चाहता है। आने वाले समय में नॉर्थ भूटान की जाकरलुंग घाटी चीन के हाथों में जा सकती है। अमेरिका की मैक्सार टेक्नोलॉजी ने जो सैटेलाइट तस्वीरें जारी की है उनमें जाकरलुंग घाटी में पिछले 2 सालों में हुए चीनी कंस्ट्रक्शन को दिखाया गया है।

 

चीन ने पहले भी भूटान के इलाकों में रोड बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, ये ज्यादातर पश्चिमी भूटान में हो रहा था। 2017 में चीन ने दक्षिण-पश्चिम में डोकलाम में रोड बनाने की कोशिश की। यहां उनकी भारतीय सैनिकों से झड़प हुई। दरअसल, डोकलाम में चीन, भारत और भूटान तीनों देशों की सीमाएं लगती हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार चीन यहां लोगों के रहने के लिए 129 बिल्डिंग्स बना रहा। थोड़ी दूर पर 62 इमारतों का कंस्ट्रक्शन भी हो रहा है। इससे साफ होता है कि चीन, भूटान में दो बड़े गांव बसा रहा है।  एक्सपर्ट डेमियन सायमन का कहना है कि चीन की भूटान पर कब्जा करने की मंशा साफ दिख रही है। चीन की तरफ से हो रही ये गतिविधियां उसकी महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती है। उन्होंने कहा- जाकरलुंग घाटी में जो कंस्ट्रक्शन हो रहा है वो सिर्फ ऑउटपोस्ट नहीं है। चीन यहां लोगों को बसाने चाहता है। लोग जो चीन का समर्थन करते हों और चीन का अभिन्न अंग हो।

 

बता दें कि  भूटान की 600 किमी सीमा चीन से लगती है। दो इलाकों को लेकर सबसे ज्यादा विवाद है।  पहला- 269 वर्ग किमी क्षेत्रफल का डोकलाम इलाका और दूसरा- उत्तर भूटान में 495 वर्ग किमी का जकारलुंग और पासमलुंग घाटी का क्षेत्र। सबसे गंभीर मामला डोकलाम का है, जहां चीन, भारत और भूटान तीनों देशों की सीमाएं लगती है। अक्टूबर 2021 में चीन और भूटान ने ‘थ्री-स्टेप रोडमैप’ के समझौते पर दस्तखत किए थे। भूटान अपने क्षेत्र में चीनी घुसपैठ को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश में चीन के साथ संबंध बढ़ा रहा है। दोनों देश सीमा निर्धारित करने पर बातचीत कर रहे हैं। अक्टूबर 2023 में भूटान के विदेश मंत्री टांडी दोर्जी ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की थी।

 

भूटान के विदेश मंत्री दोरजी के साथ मुलाकात में चीनी विदेश मंत्री ने कहा था कि चीन सीमा विवाद सुलझाने को तैयार है। भूटान के प्रधानमंत्री लोताय शेरिंग ने भी पिछले दिनों एक इंटरव्यू में चीन के डोकलाम की जमीन की अदला-बदली करने के प्रस्ताव का जिक्र किया था। ऐतिहासिक तौर पर भूटान हमेशा भारत के करीब रहा है, हालांकि उसकी फॉरेन पॉलिसी में भारत ने कभी दखलंदाजी नहीं की। 8 लाख की आबादी वाले भूटान की गुट निरपेक्ष नीति है। उसके अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस से राजनयिक संबंध नहीं है। 1949 में भारत-भूटान में विदेश नीति, व्यापार व सुरक्षा को लेकर संधि हुई थी। 2007 में विदेश नीति का प्रावधान हटा दिया गया। भारत अब भूटान का सबसे बड़ा राजनयिक और आर्थिक साथी है।

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