Edited By Tanuja,Updated: 11 Dec, 2023 02:21 PM

चीन ने प्रदूषण कंट्रोल में कमाल कर दिखाया है। यह खुलासा हुआ है एयर क्वालिटी ट्रैकर (AQT) की रिपोर्ट में । करीब 6 साल पहले चीन के शहर दुनिया में...
बीजिंगः चीन ने प्रदूषण कंट्रोल में कमाल कर दिखाया है। यह खुलासा हुआ है एयर क्वालिटी ट्रैकर (AQT) की रिपोर्ट में । करीब 6 साल पहले चीन के शहर दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित थे। साल 2017 में एयर क्वालिटी ट्रैकर एक्यूएयर की दुनिया के सबसे खराब एयर क्वालिटी के शहरों की लिस्ट में 75 शहर चीन के और भारत के 17 शहर थे। लेकिन 6 साल बाद यह स्थिति बिल्कुल बदल गई है। साल 2022 में 100 सबसे प्रदूषित शहरों में 65 भारत के, जबकि चीन के सिर्फ 16 थे। चीन ने गाड़ियों और कोल पावर प्लांट की संख्या कम करके हालात सुधार दिए।
एक्यूएयर की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 नवंबर से पहले के 30 दिनों में दिल्ली में पीएम 2.5 का औसत स्तर बीजिंग से 14 गुना ज्यादा रहा था। करीब एक दशक पहले चीन के कई बड़े शहर एयर पॉल्यूशन से जूझ रहे थे। अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी होने वाले आंकड़ों से वहां की गंभीर स्थिति का खुलासा हुआ था। चीन में आम लोगों के प्रदर्शन के बाद 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वीकार किया कि बीजिंग की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक ‘एयर पॉल्यूशन’ है।
फिर चीन ने कई अहम कदम उठाए और प्रदूषण से निपटने के लिए 22.5 लाख करोड़ का आपात फंड बनाना चीन का एक ठोस कदम था ।इसके अलावा चीन ने एयर पॉल्यूशन रोकने के लिए नेशनल लेवल का मेगा एक्शन प्लान बनाया। बीजिंग, शंघाई और ग्वांगझोऊ जैसे बड़े शहरों में वाहनों की संख्या की कंट्रोल किया। भारी उद्योगों जैसे आयरन और स्टील इंडस्ट्री के लिए प्रदूषण पर कड़े नियम बनाए। चीन ने कई कोल पावर प्लांट को बंद किया, साथ ही ऐसे नए बनाने पर भी रोक लगाई।
बता दें कि पिछले सप्ताह BMJ की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि वायु प्रदूषण की वजह से भारत में हर साल 21 लाख भारतीयों की मौत होती है। यह आंकड़ा 2019 में 16 लाख लोगों का ही था। जून में प्रकाशित वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में मुताबिक, भारत में हर साल बढ़ रहे माइक्रो पार्टिकल्स के कारण देश की जीडीपी को सालाना 0.56% का नुकसान होता है, क्योंकि इससे श्रमिकों की उत्पादकता कम होती है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के मुताबिक, चीन के फैसलों से 2013 से 2021 तक चीन में वायु प्रदूषण में 42.3% की कमी देखने को मिली। चीन के प्रदूषण कम करने से दुनिया प्रदूषण में भी कमी देखी गई।