Edited By Anu Malhotra,Updated: 21 Jan, 2026 10:25 AM

अक्सर प्रेम संबंधों के टूटने के बाद 'शादी के झूठे वादे' का सहारा लेकर दर्ज कराए जाने वाले मुकदमों पर पटना उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। जस्टिस सोनी श्रीवास्तव की एकल पीठ ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि दो बालिग...
नेशनल डेस्क: अक्सर प्रेम संबंधों के टूटने के बाद 'शादी के झूठे वादे' का सहारा लेकर दर्ज कराए जाने वाले मुकदमों पर पटना उच्च न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। जस्टिस सोनी श्रीवास्तव की एकल पीठ ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि दो बालिग अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो उसे बाद में दुष्कर्म (धारा 376) की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता, भले ही उनकी शादी न हो पाई हो।
भागलपुर के मोहम्मद सैफ अंसारी के मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने निचली अदालतों की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि निचली अदालतों को किसी Post Office की तरह काम नहीं करना चाहिए, जो सिर्फ कागजों को आगे बढ़ाए। आरोप तय करते समय जज का दायित्व है कि वह यह देखे कि क्या वाकई कोई अपराध हुआ है या मामला केवल आपसी सहमति के रिश्ते का है जो आगे नहीं बढ़ सका।
वादाखिलाफी बनाम मजबूरी
हाईकोर्ट ने इस फैसले में 'झूठे वादे' और 'परिस्थितिवश शादी न हो पाने' के बीच के बारीक अंतर को समझाया है। कोर्ट के अनुसार, यदि शादी का इरादा शुरुआत से ही धोखा देने का हो, तभी वह अपराध की श्रेणी में आ सकता है। लेकिन, अगर दो लोग एक साल तक आपसी रजामंदी से साथ रहते हैं और बाद में किन्हीं कारणों से विवाह संपन्न नहीं हो पाता, तो इसे 'आपराधिक रंग' देना न्यायसंगत नहीं है।
इस केस में पीड़िता ने दावा किया था कि आरोपी ने विवाह का झांसा देकर एक वर्ष तक संबंध बनाए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि दोनों पक्ष वयस्क थे और उनके बीच का जुड़ाव पूरी तरह स्वेच्छा से था। उच्च न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों को सही मानते हुए भागलपुर सत्र न्यायालय के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की बात कही गई थी।
कानून का दुरुपयोग रोकने की कोशिश
जस्टिस श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के नजीर बन चुके फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सहमति से बने रिश्तों के विफल होने पर उसे बलात्कार की धारा 376 के तहत दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक ढाल का काम करेगा जहां प्रेम संबंधों के टूटने को कानूनी प्रतिशोध में बदल दिया जाता है।