EPFO का बड़ा ऐलान: PF से पूरी रकम निकालने की मिली मंजूरी, पिछले पुराने नियम हुए खत्म

Edited By Updated: 13 Oct, 2025 09:31 PM

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EPFO ने सोमवार को केंद्रीय बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में EPF अकाउंट से पूरी राशि निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाने का बड़ा फैसला लिया। अब पार्शियल विड्रॉल केवल तीन कैटेगरी में होगा। शिक्षा, शादी, हाउसिंग और विशेष परिस्थितियों में निकासी सरल होगी।...

नेशनल डेस्क: अब कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अकाउंट से पूरी राशि निकालना और भी आसान हो गया है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सोमवार को केंद्रीय बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में इस संबंध में बड़ा फैसला लिया। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनसे नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF फंड तक पहुंच पहले से कहीं अधिक सरल हो जाएगी।

श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के माध्यम से इस फैसले की जानकारी साझा की और प्रेस रिलीज भी जारी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में EPF सदस्यों के लिए जीवन को आसान बनाने और नियोक्ताओं के लिए कारोबार सुगम बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले:

सरल नियम और पार्शियल विड्रॉल: पुराने 13 कठिन नियमों को समाप्त कर अब केवल तीन कैटेगरी में पार्शियल विड्रॉल की अनुमति दी गई है। इसमें बीमारी, शिक्षा, शादी, हाउसिंग और विशेष परिस्थितियों से जुड़े खर्च शामिल हैं। अब सदस्य अपने PF खाते में उपलब्ध पूरी राशि निकाल सकते हैं।

शादी और शिक्षा के लिए निकासी: पहले शिक्षा और शादी के लिए केवल 3 बार निकासी की अनुमति थी, लेकिन अब शिक्षा के लिए 10 बार और शादी के लिए 5 बार निकासी की जा सकती है।

न्यूनतम सेवा अवधि में बदलाव: मिनिमम सर्विस पीरियड को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है। पहले यह अवधि अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग थी।

विशेष परिस्थितियों में आसान निकासी: प्राकृतिक आपदा, बेरोजगारी या महामारी जैसी परिस्थितियों में अब कारण बताए बिना ही निकासी की सुविधा मिलेगी।

मिनिमम बैलेंस की सीमा: सदस्यों के खाते में हमेशा 25% राशि मिनिमम बैलेंस के तौर पर रहेगी। इससे उन्हें 8.25% ब्याज और कंपाउंड इंटरेस्ट का लाभ मिलता रहेगा, जो रिटायरमेंट के लिए अच्छा फंड तैयार करेगा।

ऑटो सेटलमेंट सिस्टम: नए नियमों के तहत दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। निकासी पूरी तरह ऑटोमैटिक होगी, जिससे क्लेम्स का निपटारा तेज़ होगा। फाइनल सेटलमेंट की अवधि को 2 महीने से बढ़ाकर 12 महीने और पेंशन निकासी की अवधि को 2 महीने से 36 महीने कर दिया गया है।

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