Edited By Rohini Oberoi,Updated: 01 May, 2025 09:13 AM

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के एक पुलिस आरक्षक को अपनी करतूतों की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। जिला सत्र न्यायालय के सत्र न्यायाधीश के एन सिंह ने शादी का झूठा वादा करके एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के दोषी पाए जाने पर पुलिस आरक्षक ज्ञानेन्द्र...
नेशनल डेस्क। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के एक पुलिस आरक्षक को अपनी करतूतों की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। जिला सत्र न्यायालय के सत्र न्यायाधीश के एन सिंह ने शादी का झूठा वादा करके एक महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने के दोषी पाए जाने पर पुलिस आरक्षक ज्ञानेन्द्र सिंह को 10 साल की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला 29 अप्रैल को सुनाया गया।
सरकारी वकील सुरेश जेठानी ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित महिला अपने किसी काम के सिलसिले में धनपुरी थाने गई थी जहां उसकी मुलाकात पुलिस आरक्षक ज्ञानेन्द्र सिंह से हुई। ज्ञानेन्द्र ने उसका फोन नंबर ले लिया और फिर दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई।
आरोप के मुताबिक ज्ञानेन्द्र ने महिला को बताया कि वह अविवाहित है और उससे शादी करेगा। इस झूठे वादे के जाल में फंसाकर वह उसे अपने किराये के घर बुढार ले जाने लगा और कई अलग-अलग जगहों पर ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब महिला ने उससे शादी करने के लिए कहा तो वह लगातार बहाने बनाता रहा और टालता रहा।
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पीड़िता ने बताया कि जब ज्ञानेन्द्र ने उससे शादी नहीं की और मारपीट करने लगा तो वह गर्भवती हो गई और उसने एक बेटे को जन्म दिया। इसी दौरान महिला को एक बड़ा झटका तब लगा जब ज्ञानेन्द्र की पहली पत्नी और बच्चे उसके किराये के मकान में रहने के लिए आ गए। तब उसे पता चला कि ज्ञानेन्द्र पहले से ही शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं।
परेशान होकर पीड़िता ने आखिरकार पुलिस में इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान डीएनए रिपोर्ट से यह भी पुष्टि हो गई कि ज्ञानेन्द्र ही शिकायतकर्ता के बेटे का जैविक पिता है।
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न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी पहले से ही विवाहित था और यह अच्छी तरह से जानता था कि वह पीड़िता से दूसरी शादी नहीं कर सकता। इसके बावजूद उसने शादी का झूठा आश्वासन देकर महिला की सहमति प्राप्त की। ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि महिला ने स्वेच्छा से शारीरिक संबंध बनाए थे। सभी तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पुलिस आरक्षक ज्ञानेन्द्र सिंह को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई।