लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का बड़ा कदम: 60 से अधिक देशों के साथ पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स गठित

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 08:58 PM

om birla parliamentary diplomacy

लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने भारत की संसदीय कूटनीति को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 60 से अधिक देशों के साथ पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स के गठन को मंजूरी दी है।

नेशनल डेस्क: लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने भारत की संसदीय कूटनीति को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 60 से अधिक देशों के साथ पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स के गठन को मंजूरी दी है। यह पहल 23 फरवरी 2026 को की गई। इसका उद्देश्य विश्व की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ावा देना, विधायी अनुभवों का आदान-प्रदान करना और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है।

बहुदलीय भागीदारी, एकजुट भारत का संदेश

इन मित्रता समूहों की खास बात यह है कि इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों के वरिष्ठ सांसद शामिल किए गए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और राष्ट्रीय मुद्दों पर एकजुटता की झलक मिलती है।

इन समूहों के जरिए व्यापार, प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक सहयोग, सामाजिक नीतियां और वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर संवाद को संस्थागत रूप दिया जाएगा। यह पहल पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ ‘पार्लियामेंट-टू-पार्लियामेंट’ और ‘पीपल-टू-पीपल’ कनेक्टिविटी को भी मजबूती देगी।

प्रमुख सांसदों को सौंपी गई जिम्मेदारी

विभिन्न देशों के लिए अलग-अलग वरिष्ठ सांसदों को नेतृत्व की भूमिका दी गई है। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:

  • Ravi Shankar Prasad – इजराइल समूह
  • P. Chidambaram – इटली समूह
  • Shashi Tharoor – फ्रांस समूह
  • Manish Tewari – जापान समूह
  • Anurag Thakur – यूरोपीय संसद समूह

इसके अलावा Asaduddin Owaisi, Kanimozhi, Supriya Sule, Gaurav Gogoi, Derek O'Brien, Akhilesh Yadav, Ram Gopal Yadav और T. R. Baalu जैसे नेता भी विभिन्न देशों से जुड़े समूहों में शामिल हैं। यह व्यापक प्रतिनिधित्व दर्शाता है कि राष्ट्रीय हितों के मुद्दे पर भारत का राजनीतिक वर्ग साझा दृष्टिकोण रखता है।

पहले चरण में शामिल प्रमुख देश

पहले चरण में जिन देशों और संस्थाओं को शामिल किया गया है, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इजराइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और यूएई शामिल हैं। आगे और देशों को जोड़ने की योजना है ताकि संसदीय सहयोग का दायरा और विस्तृत हो सके।

क्या है इस पहल का महत्व?

लोकसभा सचिवालय के अनुसार, ये समूह नियमित संवाद, अध्ययन यात्राएं और साझा बैठकों के जरिए संरचित सहयोग सुनिश्चित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की वैश्विक सक्रियता को संसदीय स्तर पर संस्थागत रूप देता है और विदेश नीति को व्यापक जनप्रतिनिधि आधार प्रदान करता है। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि एक समावेशी और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में और मजबूत होगी।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!