कल से सिगरेट-गुटखा खाना पड़ेगा भारी, बढ़ने जा रही इतनी कीमत

Edited By Updated: 31 Jan, 2026 08:17 PM

the prices of cigarettes and gutkha will increase from february 1st

अगर आपकी रोजमर्रा की खरीदारी में सिगरेट, पान मसाला या तंबाकू शामिल है, तो आने वाले दिनों में खर्च का हिसाब गड़बड़ा सकता है। 1 फरवरी से सरकार इन उत्पादों पर टैक्स वसूली का एक नया और ज्यादा सख्त सिस्टम लागू करने जा रही है, जिसका सीधा असर बाजार भाव पर...

नेशनल डेस्क : अगर आपकी रोजमर्रा की खरीदारी में सिगरेट, पान मसाला या तंबाकू शामिल है, तो आने वाले दिनों में खर्च का हिसाब गड़बड़ा सकता है। 1 फरवरी से सरकार इन उत्पादों पर टैक्स वसूली का एक नया और ज्यादा सख्त सिस्टम लागू करने जा रही है, जिसका सीधा असर बाजार भाव पर दिखेगा।  असल में जीएसटी से जुड़े कुछ बदलाव पिछले साल सितंबर में ही अधिसूचित हो चुके थे, लेकिन सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के लिए बनाए गए खास नियम अब लागू किए जा रहे हैं। इसका मतलब साफ है- अब ये नशे के सामान पहले से कहीं ज्यादा महंगे होंगे।

कितना बढ़ेगा दाम?

पीटीआई के मुताबिक, 1 फरवरी से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अलग से उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जबकि पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर वसूला जाएगा। यह अतिरिक्त टैक्स पहले से लागू जीएसटी की ऊंची दर (करीब 40 प्रतिशत) के ऊपर होगा। अब तक इन उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ क्षतिपूर्ति उपकर लगता था। नई व्यवस्था में पुराने उपकर को हटाकर ज्यादा कड़े और सीधे शुल्क लागू किए गए हैं। नतीजा यह है कि दुकानों पर इनकी कीमतों में तेज उछाल तय माना जा रहा है।

MRP बनेगी टैक्स की बुनियाद

सरकार ने टैक्स की दरों के साथ-साथ उसकी गणना का तरीका भी बदल दिया है। अब गुटखा, जर्दा, खैनी और चबाने वाले तंबाकू पर टैक्स पैकेट पर छपी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) के आधार पर वसूला जाएगा। इससे कम कीमत दिखाकर टैक्स बचाने का रास्ता बंद हो जाएगा और सरकार को वास्तविक बिक्री मूल्य पर कर मिलेगा।

कंपनियों की निगरानी और सख्त

नए नियमों में तंबाकू और पान मसाला बनाने वाली कंपनियां भी सरकार के रडार पर हैं। निर्माताओं को अब नए कानून के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। इसके अलावा फैक्ट्रियों में मौजूद हर पैकिंग मशीन पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी कर दिया गया है।

इन कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम दो साल तक सुरक्षित रखनी होगी। कंपनियों को यह भी बताना होगा कि उनके पास कितनी मशीनें हैं और उनकी उत्पादन क्षमता क्या है। अगर कोई मशीन 15 दिनों से ज्यादा समय तक बंद रहती है, तभी टैक्स में राहत की मांग की जा सकेगी।

सिगरेट पीने वालों के लिए नियम और भी सख्त हैं। केंद्रीय उत्पाद शुल्क कानून में किए गए बदलाव के अनुसार अब सिगरेट पर टैक्स उसकी लंबाई के आधार पर लगेगा। नई दरों के तहत प्रति सिगरेट 2.05 रुपये से लेकर 8.50 रुपये तक उत्पाद शुल्क देना होगा।

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