Edited By Parveen Kumar,Updated: 08 May, 2025 12:06 AM

अगर कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है, तो भारत को बहुत बड़ा फायदा हो सकता है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की कीमतों में गिरावट की वजह से भारत को 1.8 लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।
नेशनल डेस्क: अगर कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है, तो भारत को बहुत बड़ा फायदा हो सकता है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की कीमतों में गिरावट की वजह से भारत को 1.8 लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने हाल ही में यह अनुमान जताया है।
भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और अपने कच्चे तेल की 85% से ज्यादा जरूरत बाहर से पूरी करता है। पिछले साल भारत ने 242.4 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया था। अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह कम रहती हैं, तो इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम जनता को फायदा हो सकता है।
इक्रा ने अनुमान जताया है कि 2025-26 तक कच्चे तेल की कीमत 60-70 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती है। इसके साथ ही, एलएनजी के आयात पर भी बचत हो सकती है। इस साल भारत ने एलएनजी के आयात पर 15.2 अरब डॉलर खर्च किए थे। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को 1.8 लाख करोड़ रुपये और एलएनजी आयात पर 6,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।