गगनयान की उलटी गिनती शुरू! जानिए क्या साल 2027 में इंसान पहुंचेंगे भारतीय स्पेस स्टेशन?

Edited By Updated: 08 May, 2025 08:21 PM

will humans reach the indian space station in 2027

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) अब अंतरिक्ष में इतिहास रचने के बेहद करीब है। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने मंगलवार को एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि गगनयान मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं...

नेशनल डेस्क: भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) अब अंतरिक्ष में इतिहास रचने के बेहद करीब है। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने मंगलवार को एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि गगनयान मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जून महीने में इसके तहत एक अंतरिक्ष मिशन के लॉन्च की संभावना है। गगनयान भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसे लेकर देशभर में उत्साह है। इसरो प्रमुख के मुताबिक, गगनयान कार्यक्रम में कुल पांच मिशन शामिल हैं जिनमें से तीन मानवरहित और दो मानवयुक्त होंगे। सबसे पहला मानव रहित मिशन इस साल के अंत तक लॉन्च किया जाएगा। इसके बाद, 2027 की पहली तिमाही में देश की धरती से पहली बार इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

चार गगन यात्री तैयार, देश-विदेश में हो रही ट्रेनिंग
डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि गगनयान के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया जा चुका है और उनकी ट्रेनिंग भारत और विदेश दोनों जगहों पर हो रही है। इन यात्रियों को विशेष तौर पर माइक्रोग्रैविटी और अंतरिक्ष में रहने की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। भारत अब अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी बढ़ चुका है। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है। इस स्टेशन का पहला मॉड्यूल वर्ष 2028 में लॉन्च किया जाएगा। स्पेसडेक्स नाम का यह मिशन पहले ही दो सफल डॉकिंग कर चुका है और यह गगनयान की तैयारियों में मील का पत्थर माना जा रहा है।

एक्सिओम-4 मिशन देगा अहम अनुभव
गगनयान मिशन को सफल बनाने में अमेरिका के एक्सिओम-4 मिशन का भी अहम योगदान रहेगा। इस मिशन के तहत भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को जून के पहले सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) भेजा जाएगा। यह मिशन 14 दिन का होगा और इसमें शुभांशु शुक्ला माइक्रोग्रैविटी वातावरण में कई प्रयोग करेंगे। यह मिशन गगनयान की वैज्ञानिक और तकनीकी तैयारी को मजबूत करेगा।

राकेश शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाएंगे शुभांशु
गौरतलब है कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के दूसरे व्यक्ति होंगे। राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत संघ के सहयोग से अंतरिक्ष की यात्रा की थी और तब उनका प्रसिद्ध जवाब "सारे जहां से अच्छा" आज भी देशवासियों को गर्व से भर देता है।

ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में गूंजेगा भारत का नाम
7 से 9 मई के बीच दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में ‘ग्लोबल स्पेस एक्सप्लोरेशन कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 57 देशों के प्रतिनिधि और 10 अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हिस्सा ले रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन परियोजना की झलक भी देखने को मिलेगी।

2027 से 2030 तक भारत बनेगा अंतरिक्ष शक्ति
डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान का प्रतीक होंगे। उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन की हर प्रणाली ‘ह्यूमेन रेटिंग’ यानी इंसानों के लिए सुरक्षित बन चुकी है।

 

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