Edited By Niyati Bhandari,Updated: 27 Sep, 2023 09:58 AM

सनातन परम्परा में सुहागिन महिलाएं बिंदी, सिंदूर और महावर जैसी चीजों से सजती-संवरती हैं। ये उनके सुहाग के प्रतीक होते हैं और माना जाता है कि इससे उनके पति की उम्र बढ़ती है। वहीं पूर्वी
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सनातन परम्परा में सुहागिन महिलाएं बिंदी, सिंदूर और महावर जैसी चीजों से सजती-संवरती हैं। ये उनके सुहाग के प्रतीक होते हैं और माना जाता है कि इससे उनके पति की उम्र बढ़ती है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहने वाले गछवाहा समुदाय की महिलाएं एक अलग ही परम्परा का पालन करती हैं। इस समुदाय की महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए हर साल विधवा जैसी जिंदगी जीती हैं। साल में 5 महीने के लिए ये महिलाएं विधवाओं की तरह रहती हैं।

गछवाहा समुदाय की स्त्रियां इस अनोखी परम्परा का पालन प्राचीन समय से ही करती चली आ रही हैं। ये 5 महीने तक न तो कोई शृंगार करती हैं, न ही खुश रहती हैं। दरअसल उनके पति इस वक्त पेड़ों से ताड़ी उतारने जाते हैं और तब तक महिलाओं को सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करना होता है।

ताड़ के पेड़ काफी ज्यादा लम्बे और सीधे होते हैं, ऐसे में उनके काम में खतरा भी ज्यादा होता है इसीलिए उनकी पत्नियां कुलदेवी के चरणों में अपना शृंगार अर्पित करके पति की रक्षा की प्रार्थना करती हैं।
