लगातार दूसरे साल भी कोरोना महामारी के चलते रद्द हुई कांवड़ यात्रा

Edited By Updated: 03 Jul, 2021 12:05 PM

kanwar yatra 2021 canceled due to this corona

बीते वर्ष यानी 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते तमाम यात्राएं रद्द होने के बाद हर किसी को इस बात की उम्मीद थी कि 2021 में कोरोना के मामलों में कमी आते ही तमाम धार्मिक स्थल व यात्राएं प्रारंभ हो जाएंगी।

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बीते वर्ष यानी 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते तमाम यात्राएं रद्द होने के बाद हर किसी को इस बात की उम्मीद थी कि 2021 में कोरोना के मामलों में कमी आते ही तमाम धार्मिक स्थल व यात्राएं प्रारंभ हो जाएंगी। परंतु ऐसा नहीं हो पाया। हालांकि देश के कई राज्यों में करुणा के मामलों में कटौती आई है लेकिन पूरी तरह से अभी थी इसके संक्रमण से बच पाना मुश्किल है इसलिए सरकार द्वारा कई ऐसे कड़े फैसले लिए जा रहे हैं जिससे लोगों को अधिकतर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से रोका जा सके और इस खतरनाक महामारी से बचाया जा सके।

इसीलिए लगातार दूसरे वर्ष भी लगभग सभी तीर्थ यात्रा रद्द कर दी गई है। जैसे कि अमरनाथ यात्रा,चार धाम यात्रा व जगन्नाथ यात्रा। अब इस कड़ी में एक और नाम शामिल हो गया है यानि एक और यात्रा इस साल भी रद्द कर दी गई है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हर साल सावन मास में होने वाली कावड़ यात्रा के बारे में।


उत्तराखंड सरकार ने इस साल भी कावड़ यात्रा को रद्द कर दिया है। मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने बताया कि कुछ दिन पहले बताया था कि इस साल भी कावड़ यात्रा रद्द करने का फैसला लिया गया है। जिस लेकर राज्य सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने आधिकारिक आदेश जारी के बारे में जानकारी दी है।

हालांकि उत्तराखंड सरकार द्वारा कावड़ यात्रा की रद्द किए जाने पर डीआईजी ने यह बता़या गया है कि सरकार द्वारा पुलिस किसी तरह का लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

बता दें हर साल लगभग 10-15 दिन तक चलने वाली कावड़ यात्रा इस साल 25 जुलाई से प्रारंभ खोकर 6 अगस्त तक चली थी परंतु कोरोना महामारी संक्रमण के खतरे के मद्देनजर राज्य सरकार ने इसे इस साल भी रद्द करने का फैसला ले लिया है।

जानकारी के लिए बता दें कि हर वर्ष कावड़ यात्रा के लिए भगवान शिव के भक्त उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल,दिल्ली, राजस्थान तथा देश के कई अन्य राज्यों से कावड़ लेकर सबसे पहले हरिद्वार पहुंचते हैं और फिर यहां से कावड़ भरकर वापस अपने घरों की तरफ से निकलते हैं जिस तरह अधिकतर श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं।

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