Edited By Niyati Bhandari,Updated: 12 Jun, 2026 07:19 AM

Phalgu Tirtha Kaithal: जानें, क्यों युधिष्ठिर ने दिया था सोमवती अमावस्या को श्राप? पांडवों के श्राप और सोमवती अमावस्या का पौराणिक रहस्य। कैथल के फल्गु तीर्थ का महत्व, जहां महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने पितृ तर्पण के लिए किया था वर्षों इंतज़ार।
Phalgu Tirtha Kaithal: सनातन धर्म में पितरों की आत्मिक शांति और मोक्ष के लिए पिंडदान का विशेष महत्व है, लेकिन हरियाणा के कैथल में स्थित फल्गु तीर्थ की महिमा निराली है। श्राद्ध पक्ष और सोमवती अमावस्या के शुभ अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की मुक्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं। इस तीर्थ का इतिहास इतना गहरा है कि स्वयं पांडवों को भी यहां पिंडदान करने के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी थी। महाभारत के युद्ध में मारे गए अपने सगे-संबंधियों की आत्मा की शांति के लिए पांडव इस पावन भूमि पर आए थे, लेकिन एक विशेष खगोलीय संयोग न बनने के कारण जो हुआ, उसने इस तीर्थ को कलयुग के लिए और भी महत्वपूर्ण बना दिया।
महाभारत युद्ध के बाद पांडवों की व्याकुलता: क्यों चुना गया फल्गु तीर्थ?
महाभारत के वन पर्व और ग्यारहवें पर्व में इस तीर्थ की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है, जहां युद्ध के बाद युधिष्ठिर दिवंगत आत्माओं की मुक्ति के लिए चिंतित थे।

भीष्म पितामह का दिव्य संदेश: फलकी ऋषि की तपोभूमि पर ही संभव है पूर्ण मोक्ष
श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन पर जब पांडव शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह के पास पहुंचे, तब उन्होंने फलकी वन के सरोवर की पवित्रता और पितृ तर्पण के फल के बारे में बताया।

वर्षों का लंबा इंतज़ार और युधिष्ठिर का क्रोध: क्यों मिला सोमवती अमावस्या को श्राप?
पांडवों ने फल्गु तीर्थ पर पिंडदान के लिए वर्षों तक सोमवती अमावस्या का इंतज़ार किया लेकिन जब वह नहीं आई तो क्रोधित होकर युधिष्ठिर ने इसे कलयुग में जल्दी-जल्दी आने का श्राप दे दिया।
तिलांजलि से लेकर गौ सेवा तक: फल्गु तीर्थ पर पितरों को प्रसन्न करने के सरल विधान
यहां केवल दान-दक्षिणा ही नहीं, बल्कि श्रद्धापूर्वक एक मुट्ठी तिल अर्पित करने या गौ माता को एक दिन का चारा खिलाने से भी पितर तृप्त हो जाते हैं।
