Edited By Niyati Bhandari,Updated: 09 Apr, 2026 02:24 PM

Janaki Jayanti Date 2026: सनातन धर्म में माता सीता का प्राकट्य दिवस, जिसे हम सीता नवमी या जानकी जयंती के रूप में मनाते हैं, धैर्य, त्याग और पतिव्रता धर्म के उत्सव का प्रतीक है। साल 2026 में इस पावन पर्व की तिथि को लेकर भक्तों के बीच उलझन की स्थिति...
Janaki Jayanti Date 2026: सनातन धर्म में माता सीता का प्राकट्य दिवस, जिसे हम सीता नवमी या जानकी जयंती के रूप में मनाते हैं, धैर्य, त्याग और पतिव्रता धर्म के उत्सव का प्रतीक है। साल 2026 में इस पावन पर्व की तिथि को लेकर भक्तों के बीच उलझन की स्थिति बनी हुई है। आइए पंचांग और उदयातिथि के गणित से समझते हैं कि व्रत किस दिन रखा जाएगा। 24 या 25 अप्रैल?

पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आगाज़ 24 अप्रैल 2026 को रात 07:21 बजे हो रहा है। यह तिथि अगले दिन यानी 25 अप्रैल 2026 को शाम 06:27 बजे समाप्त होगी। चूंकि हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों के लिए उदयातिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को ही प्रधानता दी जाती है, इसलिए इस साल सीता नवमी का पर्व और व्रत 25 अप्रैल, शनिवार को ही मनाया जाएगा।
पूजा का महामुहूर्त: केवल 2 घंटे 36 मिनट का समय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता का प्राकट्य दोपहर (मध्याह्न) के समय हुआ था। 25 अप्रैल को पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 10:58 बजे से दोपहर 01:34 बजे तक रहेगा। भक्तों के पास पूजन के लिए कुल 2 घंटे 36 मिनट का शुभ समय होगा। इस विशेष अवधि में किए गए मंत्र जाप और अनुष्ठान का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।

अखंड सौभाग्य के लिए 'पूजा विधि' सीता नवमी पर माता सीता की विशेष कृपा पाने के लिए इस विधि का पालन करें:
संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
स्थापना: घर के ईशान कोण में लाल वस्त्र बिछाकर प्रभु श्री राम और माता जानकी की प्रतिमा स्थापित करें।
श्रृंगार: माता को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, बिंदी, लाल चुनरी और चूड़ियां अर्पित करें।
मंत्र: पूजा के दौरान "ओम श्री सीतायै नमः" का निरंतर जाप करें।
भोग: माता को शुद्ध घी की मिठाई या केसरिया भात का भोग लगाएं।
जानकी जयंती का महत्व: श्री राम के बिना अधूरी है देवी सीता की पूजा। माता जानकी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में राजा जनक को हल जोतते समय भूमि से माता सीता प्राप्त हुई थीं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं को सुखद वैवाहिक जीवन और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
