Yadadri Temple: भगवान नृसिंह के यदाद्री मंदिर पर तेलंगाना सरकार ने खर्च किए 1,800 करोड़ रुपए

Edited By Updated: 30 Sep, 2023 11:00 AM

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भगवान विष्णु ने धरती पर कई अलग-अलग अवतार लिए। उनमें से एक अवतार नृसिंह का था। यह भगवान विष्णु का चौथा अवतार माना जाता है।

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Yadadri Yadagirigutta Lakshmi Narasimha Mandir: भगवान विष्णु ने धरती पर कई अलग-अलग अवतार लिए। उनमें से एक अवतार नृसिंह का था। यह भगवान विष्णु का चौथा अवतार माना जाता है। भगवान नृसिंह आधे मानव एवं आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए थे, जिनका सिर एवं धड़ तो मानव का था लेकिन चेहरा एवं पंजे सिंह की तरह थे। इनकी पूजा दक्षिण भारत में वैष्णव संप्रदाय के लोगों द्वारा की जाती है।

वैसे तो देश में भगवान नृसिंह के कई मंदिर हैं लेकिन हैदराबाद से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर यदाद्री भुवनगिरी जिले में मौजूद लक्ष्मी-नृसिंह मंदिर का विशेष महत्व है। स्कंद पुराण के अनुसार महर्षि ऋष्यश्रृंग के पुत्र यदा ऋषि ने यहां भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी। उनके तप से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें नृसिंह रूप में दर्शन दिए थे।

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महर्षि यदा की प्रार्थना पर भगवान नृसिंह तीन रूपों में- ज्वाला नृसिंह, गंधभिरंदा नृसिंह और योगानंदा नृसिंह यहीं विराजित हो गए। दुनिया में एकमात्र ध्यानस्थ पौराणिक नृसिंह प्रतिमा इसी मंदिर में है।

हाल ही में इस हजारों साल पुराने मंदिर का कायाकल्प किया गया और इसे विश्वस्तरीय हिंदू आध्यात्मिक ठिकाने का स्वरूप दिया गया है। इसके लिए तेलंगाना की सरकार ने 1,800 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह तेलंगाना सरकार का ड्रीम प्रोजैक्ट है। इसकी योजना पर काम मार्च 2015 में शुरू किया गया था और मंदिर का पुननिर्माण वैष्णव संत चिन्ना जियार स्वामी के मार्गदर्शन में शुरू हुआ, जो गत वर्ष ही पूरा हुआ है।

मंदिर बनाने के लिए इंजीनियरों और आर्किटेक्टस ने करीब 1,500 नक्शों और योजनाओं पर काम किया। 2016 में इसकी योजना को मंजूरी मिली थी। इस मंदिर का डिजाइन हैदराबाद के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट और साऊथ फिल्मों के आर्ट डायरैक्टर आनंद साईं ने तैयार किया। यहां यात्रियों के लिए अलग-अलग तरह के गैस्ट हाऊसों का निर्माण भी किया गया है। वी.आई.पी. व्यवस्था के तहत 15 विला भी बनाए गए हैं।

1,900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण
हजारों साल पुराने इस मंदिर का क्षेत्रफल करीब 9 एकड़ था। मंदिर के विस्तार के लिए 300 करोड़ रुपए में 1,900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया। मंदिर में करीब 39 किलो सोने और 1,753 टन चांदी से सारे गोपुर (द्वार) और दीवारें मढ़ी गई हैं। इसकी लागत करीब 700 करोड़ रुपए है।

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सोने का गर्भगृह
यदाद्री का मुख्य शिखर, जो गर्भगृह के ऊपर है, उसे सोने से मढ़ा जा रहा है। करीब 32 लेयर वाले इस शिखर को सोने से मढ़ने के लिए बड़ी एजैंसियों की मदद ली जा रही है। इसमें शिखर पर पहले तांबे की परत चढ़ाई जा रही है, फिर सोना मढ़ा जाएगा। अनुमान है कि इसमें करीब 27 किलो सोना लगेगा और मंदिर में करीब 39 किलो सोना है। मंदिर के निर्माण के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है, वे हर तरह के मौसम की मार झेल सकते हैं। लगभग 1000 साल तक ये पत्थर वैसे ही रह सकेंगे, जैसे कि अभी हैं। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है।

मंदिर के मुख्य रक्षक देवता हनुमान
मंदिर के पास ही मुख्य द्वार के रूप में भगवान हनुमान की एक खड़ी प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इस मंदिर में लक्ष्मी-नृसिंह के साथ ही हनुमान जी का मंदिर भी है। इस कारण हनुमान जी को मंदिर का मुख्य रक्षक देवता माना गया है। इस प्रतिमा को करीब 25 फुट के स्टैंड पर खड़ा किया गया है। प्रतिमा कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती है। यदाद्री पर्वत को पंच नृसिंह के स्थान के रूप में भी जाना जाता है।

हर दिन 10 हजार लोग कर सकेंगे भोजन
यहां अन्न प्रसाद के लिए भी पूरी व्यवस्था की गई है। यहां रोज लगभग 10 हजार लोगों के लिए भोजन तैयार हो सकता है। जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, उसी हिसाब से अन्न प्रसादम् की व्यवस्था भी बढ़ाई जा सकती है।

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