Edited By Ashutosh Chaubey,Updated: 01 May, 2025 12:48 PM

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। ऐसे समय में दुनिया की निगाहें एक और देश पर हैं – चीन, जो पाकिस्तान का 'ऑल वेदर फ्रेंड' माना जाता है। सवाल यह है कि मौजूदा हालात में चीन पाकिस्तान का कितना और किस...
इंटरनेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। ऐसे समय में दुनिया की निगाहें एक और देश पर हैं – चीन, जो पाकिस्तान का 'ऑल वेदर फ्रेंड' माना जाता है। सवाल यह है कि मौजूदा हालात में चीन पाकिस्तान का कितना और किस तरह से समर्थन कर सकता है? क्या वह भारत के ख़िलाफ़ खुलकर खड़ा होगा या कूटनीतिक संतुलन बनाए रखेगा?
चीन ने आलोचना साथ संतुलन भी साधा
पहलगाम आतंकी हमले की चीन ने आलोचना की और हर प्रकार के आतंकवाद का विरोध करने की बात कही। साथ ही, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत और पाकिस्तान, दोनों से संयम बरतने की अपील की और निष्पक्ष जांच का समर्थन भी किया। हालांकि, चीन ने पाकिस्तान के "न्यायोचित रक्षा हितों" का समर्थन दोहराया, लेकिन भारत के खिलाफ कोई सीधा रुख नहीं अपनाया। इससे स्पष्ट है कि चीन पारंपरिक 'कूटनीतिक संतुलन' की नीति पर कायम है।
आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताएं
चीन की नीति उसकी आर्थिक और क्षेत्रीय रणनीतियों से गहराई से जुड़ी है। पाकिस्तान में वह CPEC के ज़रिए 62 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है, जबकि भारत भी चीन का एक अहम व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। चीन नहीं चाहता कि भारत-पाक तनाव बढ़े, जिससे उसके निवेश और ग्वादर बंदरगाह जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट खतरे में पड़ जाएं। इसके अलावा, अमेरिका के साथ चल रही व्यापारिक तनातनी के दौर में चीन भारत के साथ नया टकराव नहीं चाहता।

पाकिस्तान की उम्मीदें और चीन की सीमाएं
पाकिस्तान को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन उसका समर्थन करता रहेगा, जैसा कि वह FATF और UNSC जैसे मंचों पर करता आया है। सैन्य मोर्चे पर भी चीन पाकिस्तान को मिसाइल, ड्रोन और रक्षा तकनीक उपलब्ध कराता है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के अनुसार, पाकिस्तान के करीब 80% हथियार चीन से ही आते हैं। फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि जंग की स्थिति में चीन प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से बचेगा और भारत के खिलाफ खुला मोर्चा नहीं खोलेगा।

भारत के प्रति चीन की संकेतों वाली रणनीति
भारत को लेकर चीन की रणनीति 'संकेतों की राजनीति' पर आधारित है। वह खुलकर भारत के खिलाफ नहीं बोलता, लेकिन दो मोर्चों वाले युद्ध (Two-Front War) की आशंका को बनाए रखने की कोशिश करता है। डोकलाम और गलवान जैसी घटनाएं इसी रणनीति का हिस्सा रही हैं। हालांकि हालिया समय में भारत और चीन के बीच रिश्तों में थोड़ा सुधार हुआ है, जिससे साफ है कि चीन फिलहाल भारत के साथ खुला टकराव टालना चाहता है।