Edited By Anu Malhotra,Updated: 21 Jun, 2025 10:03 AM

देश में सोने की कीमतों ने इस साल रिकॉर्ड ऊँचाई छू ली थी, लेकिन अब वो तेजी से नीचे की ओर लौट रही हैं। यह बदलाव सिर्फ व्यापारियों के लिए बल्कि निवेशकों के लिए भी गंभीर संकेत हैं। 16 जून को सोने की कीमतें MCX पर ₹1,01,078 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई...
नेशनल डेस्क: देश में सोने की कीमतों ने इस साल रिकॉर्ड ऊँचाई छू ली थी, लेकिन अब वो तेजी से नीचे की ओर लौट रही हैं। यह बदलाव सिर्फ व्यापारियों के लिए बल्कि निवेशकों के लिए भी गंभीर संकेत हैं।
सोने की तेजी से गिरावट की ओर रुख
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पिछले रिकॉर्ड के बाद गिरावट
16 जून को सोने की कीमतें MCX पर ₹1,01,078 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई थीं, लेकिन अब यह ₹99,096 के स्तर पर आ गई है—यानि रिकॉर्ड से ₹1,982 की बड़ी गिरावट दर्ज की गई
डॉलर और बाजार भावना बदल रहे हालात
वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार, डॉलर के मजबूत होने और ताक़तदार बाजारों में निवेश के चलते सोने की मांग में कमी आई है ।
विशेषज्ञों का अनुमान – दो महीने में 12–15% तक गिरावट?
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Quant Mutual Fund का मानना है कि अगले दो महीनों में 12–15% तक गिरावट हो सकती है Citi Research की रिपोर्ट के अनुसार, Q3 (जुलाई–सितंबर) में सोने की कीमत $3,100–$3,300 प्रति औंस तक जा सकती है और दूसरे हाफ 2026 तक $2,500–$2,700 के बीच आ सकती है—जिसका मतलब भारतीय रुपये में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग ₹77,000 तक गिर सकती है
क्यों हो रही गिरावट? मुख्य वजहें
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ग्लोबल इकॉनमिक होप: आर्थिक सुधार और जोखिम भरे निवेशों की वापसी
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डॉलर की ताक़त: मजबूत डॉलर से सोने की मांग प्रभावित हुई
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टैरीफ वार और जेओपीएल डिप्लोमैसी की उम्मीद: तनाव घटने से सोने की सुरक्षित निवेश की मांग घट रही है
भविष्य की तस्वीर
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0–3 माह: $3,100–$3,500 प्रति औंस (Citi Base Case)
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6–12 माह: गिरावट $2,500–$2,700 पर जा सकती है
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बुलिश केस: Geopolitical तनाव से अगर फिर बढ़े, तो $3,500 तक की रैली संभव
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बेयरिश केस: वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था मजबूत होने पर $3,000 से नीचे भी आ सकता है, जिसका मौका लगभग 20% आंका जा रहा है
निवेशकों के लिए क्या सोचें?
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शार्ट-टर्म निवेशक को सतर्क रहने की सलाह है, क्योंकि 12–15% तक गिरावट आ सकती है
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मध्यम/दीर्घकालीन निवेशक के लिए सोना अब भी अच्छा विकल्प है—यह मुद्रास्फीति और भूराजी जोखिमों के लिए बफ़र प्रदान करता है ।
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ट्रैडिंग रणनीति अपनाने वालों को अमेरिकी डॉलर और ब्याज़ दर से जुड़े रुझानों पर नज़र रखनी चाहिए।